नई दिल्ली: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने काबुल के प्रति तीखे तेवर दिखाए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में रहने वाले सभी अफगान नागरिकों को अपने देश वापिस जाना होगा। अब अफगानिस्तान के साथ पहले जैसे संबंध नहीं रहेंगे। उनके इस बयान के बाद अब सीमापार तनाव बढ़ चुका है।
सोशल मीडिया पोस्ट और अपने सार्वजनिक बयानों में विदेश मंत्री ने कहा कि काबुल की अपनी सरकार और व्यवस्था है इसलिए अब पाकिस्तान की जमीन और संसाधन 25 करोड़ पाकिस्तानियों के हैं। विदेशी शरणार्थियों के कारण स्थानीय सुरक्षा और संसाधनों पर भी दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा है कि पाकिस्तान काफी समय तक धैर्य रखता रहा है पर अफगान पक्ष से उसे कोई भी पॉजिटिव प्रतिक्रिया नहीं मिली।
युद्धविराम के बाद भी हुआ हमला
दोनों पक्षों में तनाव के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान की ओर से कुछ समय पहले 48 घंटे के लिए युद्धविराम पर सहमति भी जताई गई थी। इसके बाद में बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के लिए बढ़ाने पर चर्चा हुई हालांकि आरोप यह है कि युद्धविराम के तुरंत बाद पाकिस्तान ने पक्तिका और आस-पास के कुछ क्षेत्रों में हवाई हमले भी किए। इसके बाद तालिबान ने कहा कि युद्धविराम टूट गया। इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच शांति प्रयासों को भारी झटका लगा।
भारी कीमत चुकानी पड़ेगी
रक्षा मंत्री ने इस बात का दावा किया है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को सीमा पार से होने वाली आंतकवादी घटनाओं के बारे में कई नोटिस दिए हैं। उन्होंने 836 विरोध पत्र और 13 डेमार्श भेजने का हवाला दिया। अब सिर्फ कूटनीतिक अपीलों या पत्रों पर निर्भर नहीं रहा जाएगा। ख्वाजा आसिफ ने यह दावा किया है कि जहां से भी आतंकवाद की हरकतें आ रही हैं उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
तालिबान सरकार पर भी लगाए गंभीर आरोप
आसिफ ने काबुल में शासन करने वाली तालिबान सरकार पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि तालिबान भारत के हितों के लिए काम कर रहा है। भारत और प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के बीच मिलीभगत से पाकिस्तान के खिलाफ साजिश हो रही है। इस आरोप को भारत ने खारिज कर दिया है और क्षेत्रीय खिलाड़ियों के द्वारा लगाए गए आरोप-प्रत्यारोप ने स्थिति को और भी कठिन बना दिया है।
पाकिस्तान को उठाने पड़े नुकसान
रक्षा मंत्री का कहना है कि 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान को मानवीय सुरक्षा क्षेत्रों में बड़े नुकसान उठाने पड़े हैं। उन्होंने 10,347 आतंकी घटनाओं और 3,844 हताहतों का जिक्र करते हुए इस अवधि में हुई हिंसा को गिनती पेश की है। आसिफ ने कहा कि यदि अफगान हिस्सों से हमला हुआ तो पाकिस्तान उसका सख्त और निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार है।
रिपोर्ट्स की मानें तो कूटनीति जारी रखने की फिर से कोशिश की जा रही है। कतर में संभावित मुद्दे पर बातचीत और सीजफायर की भी बात की जा रही है ताकि सीमावर्ती हिंसा को कंट्रोल किया जा पाए। आगे के लिए कूटनीतिक राह ढूंढी जा पाए वहीं दूसरी ओर हवाई हमलों और एक-दूसरे पर लगे हुए आरोपों ने क्षेत्रीय तनाव को तेज कर दिया है। ऐसे में दोबारा से हिंसा की आशंका बनी हुई है।