नई दिल्लीः ईरान ने दुबई बंदरगाह के पास लंगर डाले एक पूरी तरह से भरे कच्चे तेल के टैंकर पर हमला किया, जिससे उसमें आग लग गई और उसके बाहरी हिस्से को नुकसान पहुंचा। वहीं अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सोमवार रात को किया गया। इसके लिए 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस डिपो में बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री रखी गई थी, जिसे निशाना बनाया गया। बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल मजबूत और भूमिगत ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जाता है। हमले के बाद डिपो में रखे हथियारों में विस्फोट होने से कई धमाके हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सोशल मीडिया पर धमाकों का एक वीडियो शेयर किया है।
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उधर, कुवैत की सरकारी न्यूज एजेंसी ने कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प के हवाले से बताया कि कंपनी ने तेल फैलने की आशंका की भी चेतावनी दी। यह घटना खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर हमलों की एक कड़ी में सबसे नई घटना है। इन हमलों में मिसाइलों और विस्फोटक हवाई और समुद्री ड्रोनों का इस्तेमाल किया गया है। कुवैत की सरकारी तेल कंपनी ने बताया, “यूएई में दुबई पोर्ट के एंकरेज एरिया में मौजूद कुवैत के एक विशाल कच्चे तेल के टैंकर पर ईरान ने सीधा और दुर्भावनापूर्ण हमला किया।” दुबई के अधिकारियों ने बताया कि वे स्थानीय जलक्षेत्र में तेल टैंकर को निशाना बनाकर किए गए ड्रोन हमले से निपट रहे हैं और समुद्री अग्निशमन दल आग बुझाने का काम कर रहे हैं।
ईरान को लेकर अमेरिका-इजराइल युद्ध के बीच दक्षिण कोरिया में ऊर्जा संकट का खतरा बढ़ गया है। राष्ट्रपति ली जे म्यंग ने कैबिनेट को इस स्थिति से निपटने के लिए सख्त और आपात कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। योनहाप न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कैबिनेट बैठक में ली ने कहा कि दक्षिण कोरिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी हद तक निर्भर है, इसलिए ज्यादा सतर्क रहने और तुरंत जरूरी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि संभावित संकट को देखते हुए वैकल्पिक योजनाएं तैयार रखें और आपूर्ति में किसी भी बाधा से निपटने के लिए तैयार रहें। दक्षिण कोरिया अपनी करीब 70 प्रतिशत तेल आपूर्ति मिडिल ईस्ट से करता है, ऐसे में क्षेत्र में जारी संघर्ष का सीधा असर देश की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।