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मुफ्त बिजली पर केंद्र का नया आदेश जारी, पंजाब पर पड़ेगा असर

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नई दिल्लीः मुफ्त बिजली के मामले में केंद्र सरकार की ओर से नया आदेश जारी किया गया है। जिससे राज्य सरकारों पर भारी बोझ पड़ सकता है। वहीं पंजाब की बात करें तो इस नए आदेश से माननीय सरकार को 5 से 6 हजार करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर जमा कराने होंगे। केंद्र सरकार के नए आदेशों के तहत बिजली बिल दूसरी संशोधन नियम 2023 के तहत केंद्र ने देश की सरकारों से सब्सिडी बिल पहले ही जमा करने को कहा है। सरकार ने ऐसा नहीं करने पर उपभोक्ताओं से पूरा बिल वसूलने की बात कही है।

जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक, राज्यों के नियामक आयोगों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न श्रेणियों को दी जाने वाली सब्सिडी हर तिमाही के दौरान बिजली कंपनियों के पास अग्रिम रूप से जमा की जानी चाहिए। ऐसा नहीं होने पर नियामक आयोग से अनुदान प्राप्त लाभुकों को बिल जारी करने को कहा गया है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में 26 जुलाई को अधिसूचना जारी कर दी गई है। 

केंद्र सरकार के इस नए आदेश का असर पंजाब स्टेट पावरकॉम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) पर भी पड़ेगा। राज्य नियामक आयोग ने 13 सितंबर 2007 को राज्य सरकार को सब्सिडी भुगतान अग्रिम करने का आदेश दिया था, लेकिन तब से किसी भी सरकार ने इन आदेशों को लागू नहीं किया है। परिणामस्वरूप, सब्सिडी की राशि बड़े पैमाने पर जमा होती रहती है। पीएसपीसीएल विभिन्न श्रेणियों को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की वार्षिक मुफ्त बिजली प्रदान करता है।

इसमें कृषि क्षेत्र का करीब 10 हजार करोड़, 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली और बाकी उद्योगों, पिछड़े वर्ग आदि को दी जाने वाली बिजली करीब 6 हजार करोड़ शामिल है। इस तरह राज्य का कुल बिजली सब्सिडी बिल 20,24376 करोड़ रुपये बनता है। जबकि 1,804 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त और 9,020 करोड़ रुपये की बकाया सब्सिडी राशि का भुगतान किया जाना बाकी है। बता दें कि 31 जुलाई तक पीएसपीसीएल पर सरकार का अनुमानित बकाया अभी भी 1700 करोड़ के आसपास है। अगर सरकार हर तिमाही में सब्सिडी एडवांस देती है तो सरकार को पीएसपीसीएल को 5 से 6 हजार करोड़ रुपये का एडवांस देना होगा।

उधर, पीएसईबी इंजीनियर्स बॉडी के चीफ पैट्रन इंजी. पदमजीत सिंह ने कहा कि 2007 में इलेक्ट्रिसिटी अपीलेट अथॉरिटी के आदेश पर पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने ऐसे आदेश दिए थे। जिसके लिए सरकार को सोचना होगा कि ये आदेश कैसे जारी किए जाएं। पदमजीत सिंह ने 15 साल से अधिक समय से बिजली सब्सिडी के अग्रिम भुगतान पर नियामक आयोग के आदेशों को लागू नहीं करने के लिए पंजाब की पिछली सरकारों की आलोचना की है।

पदमजीत सिंह ने कहा कि यह विफलता राज्य नियामक आयोग जैसे वैधानिक निकायों द्वारा पारित कानूनों की पूर्ण अवहेलना दर्शाती है। उन्होंने कहा कि 13 सितंबर 2007 को आयोग ने राज्य सरकार को हर तिमाही की शुरुआत में तिमाही किस्तों में सब्सिडी का भुगतान करने का निर्देश दिया था।

2011 में, उन्होंने पीएसईआरसी से राज्य सरकार को सब्सिडी का समय से पहले भुगतान करने के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया। इन आदेशों में नियामक आयोग ने पीएसपीसीएल को निर्देश दिया था कि यदि सरकार सब्सिडी राशि का अग्रिम भुगतान करने में विफल रहती है तो उपभोक्ताओं से पूरा टैरिफ वसूला जाए।

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