जालंधर, ENS: पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध का असर भारत पर देखने को मिल रहा है। वहीं इस युद्ध के कारण बासमती चावल व्यापार को भारी झटका लगा है। इस कारण शिपमेंट बाधित हो रहे हैं, माल ढुलाई की लागत बढ़ रही है। मामले की जानकारी देते हुए मंडी फेंटनगंज के व्यापारी दविंदर बहल ने बताया कि व्यापारियों पर युद्ध का असर देखने को मिल रहा है। इंडस्ट्री को डीजल की दिक्कत आने के कारण काम कम हो गया है। वहीं लेबर भी इंडस्ट्री में कम हो रही है और गैस की भी कमी है। इसी के साथ दालों के दामों में भी 10 रुपए प्रति किलों बढ़ौतरी देखने को मिली है। बासमती चावल के दामों में बढ़ौतरी देखने को मिली है। ऐसे में मंडी में ग्राहक नहीं है और मंडी में सन्नाटा पसरा हुआ है। उन्होंने कहा कि ढुलाई में भी 100 तक का असर देखने को मिला है।
हालांकि पंजाब में पेट्रोल-डीजल लोगों को पर्याप्त मिल रहा है। इस दौरान उन्होंने लोगों से गैस को लेकर पैनिक ना होने की अपील की है। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। ऐसे में जल्द हालात काबू पर होने की संभावना है। वहीं मंडी फेंटनगंज में चावल एसोसिएशन के प्रधान नरेश मित्तल ने बताया कि युद्ध के कारण अभी कमी नहीं देखने को मिली है। वहीं दामों में बढ़ौतरी को लेकर युद्ध के कारण कोई बदलाव भी नहीं देखने को मिला है। मंडी में महीने से अधिक का स्टॉक पर्याप्त है। किसी भी चावल पर अभी कोई असर देखने को नहीं मिला है। युद्ध को लेकर खाने-पीने पर कोई असर नहीं है।
व्यापारी विकास कुमार ने बताया कि पंजाब में बासमती चावल का असर खास नहीं देखने को मिला है। हालांकि यूपी, बिहार में लोडिंग को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहां पर भी पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर ढुलाई में परेशानी हो रही है। ऐसे में पंजाब में अभी तक कोई बढ़ौतरी नहीं हुई है। 50,000 मीट्रिक टन की गिरावट को लेकर व्यापारी ने कहा कि युद्ध के कारण माल विदेश में नहीं जा रहा और समुद्र के पास तट पर भी फंसा हुआ है। व्यापारी की कहना है कि ढुलाई की लागत में अभी लोग पैनिक नहीं हो रहे है और ना ही चावल को लेकर कोई खास डिमांड बढ़ी है। व्यापारी ने कहा कि यूपी,बिहार, बंगाल सहित अन्य राज्यों में ढुलाई में दिक्कत का सामना करना पड़ा रहा है और 3 से 4 दिन तक ट्रक सड़कों पर तेल की कमी के कारण खड़े है। लोगों को पैनिक ना होने की अपील की गई है।