जालंधरः अगर रात 9 बजे के बाद बस स्टैंड या आसपास किसी काम से जाना पड़े तो थोड़ा सावधान रहें। रात होते ही बस स्टैंड के चारों ओर सड़कों पर गिरोह सक्रिय हो जाता है। यहां सड़क पर सरेआम युवतियां व महिलाएं सौदेबाजी करने लगती हैं। इनके झांसे में फंस गए तो फिर यहां से बचकर निकलना मुश्किल है। इस धंधे के अलावा यहां महिलाओं के साथी और नशेड़ी कभी भी लूटपाट कर सकते हैं। रात को की गई पड़ताल में सामने आया कि बस स्टैंड के बाहर सड़कों पर यह गंदा काम सरेआम चल रहा है। यह सड़कें एक तरह से रात को रेड लाइट एरिया बन जाती हैं।
बस स्टैंड पर रात को भी सैंकड़ों यात्री आते-जाते हैं। कई बार लोग इनके झांसे में फंसकर लुट चुके हैं। जहां यह सब सौदेबाजी होती है उससे कुछ ही दूरी पर बस स्टैंड पुलिस चौकी भी है, लेकिन किसी को कोई डर नहीं है। आसपास रहने वाले लोग भी परेशान हैं। वह कहते है कि अगर आवाज को उठाते हैं तो डर रहता है कि नशेड़ी कहीं रात को उन्हें या परिवार को नुकसान न पहुंचा दें।
रात करीब 10.30 बजे नरिंदर सिनेमा के पास गली में तीन महिलाएं खड़ी थीं। उनके पास दो गाड़ियां और एक बाइक सवार दो युवक खड़े हुए थे। कार उनके पास लेकर गए तो एक महिला आकर बात करने ली। वह नशे में थी। साहब कोई टेंशन नहीं है। मेरे साथ किसी भी होटल में चलो कोई आधार कार्ड नहीं लेगा।
रात 11 बजे बस स्टैंड फ्लाईओवर से नीचे उतरते आरटीओ ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक के पास खाली प्लाट के पास कुछ युवतियां बाइक सवार व कार में सवार कुछ लोगों से सौदेबाजी कर रही थीं। पास में डीएचएल कोरियर की दुकान खुली हुई थी। अंदर चार युवक काम कर रहे थे। उनके पास एक ई रिक्शा वाला खड़ा हुआ था। नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि सर, यह हर रोज का काम है। उन्हें खुद शर्मिंदगी महसूस होती है। शिकायत करने से डर लगता है कि कल कहीं इनके नशेड़ी साथी हम पर हमला न कर दें।
बस स्टैंड के आसपास इस गिरोह में कुछ ई-रिक्शा चालक भी शामिल हैं। अगर उन्हें पुलिस की गाड़ी आती दिखती है तो वे पास खड़े ई-रिक्शा में सवारी बन बैठ जाती हैं। पुलिस के जाते ही फिर वहीं धंधा शुरू हो जाता है।