नई दिल्ली: ईरान पर इजरायल-अमेरिका का हमला कोई सामान्य बमबारी नहीं थी। उन्होंने महीनों तक इंतजार किया। हजारों घंटे की जासूसी और सिग्नल इंटरसेप्ट किया। सिर्फ एक चीज का इंतजार था। जब ईरान का सुप्रीम लीडर खामेनेई, राष्ट्रपति पेजेश्कियन और सारे सीनियर मिलिट्री कमांडर एक ही जगह एक ही कमरे में बैठे हो।
हमले की नहीं थी उम्मीद
28 फरवरी 2026 को वह पल आ गया। स्थानीय समय के अनुसार, 8:15 बजे सुबह स्ट्राइक हुई वो भी दिन के समय में। पहले इजरायल ने ईरान पर सारे हमले रात में किए थे। जून 2025 में अंधेर में। अक्टूबर 2024 में आधी रात के बाद। ईरान ने सोचा भी नहीं था कि इस बार हमला दिन में होगा।
ईरान की पूरी एयर डिफेंस व्यवस्था इस बात पर टिकी थी कि इजरायल रात में ही हमला करेगा लेकिन इस बार इजरायल ने दिन के उजाले में हमला किया क्योंकि निशाना इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। निशाना था एक मीटिंग। हमले में खामेनेई और पेजेश्कियन को निशाना बनाया गया। अमेरिका और इजरायल ने कई महीनों से साथ मिलकर प्लानिंग की थी। इजरायल के अधिकारियों ने कहा कि हमला ठीक उसी जगह पर हुआ है जहां ईरान के सबसे बड़े नेता इकट्ठे हुए थे। इसका मतलब तेहरान में अंदरखाने कोई ऐसा है जिसने इजरायल अमेरिका को सटीक सूचना दी।
ऐसे हुई इजरायल की तैयारी
इजरायल ओवदा एयरबेस पर F-22 लड़ाकू विमान, बेन गुरियन पर टैंकर, अल उदेद, बस खाली, 270 ट्रांसपोर्ट फ्लाइट्स सब कुछ एक ही चीज के लिए था। सिर्फ एक सटीक हमले के लिए सिर्फ एक मीटिंग को निशाना बनाने के लिए। इजरायल ने रात को इंतजार नहीं किया। उन्होंने दिन में ही हमला किया क्योंकि उन्हें पता था कि मीटिंग हो रही है।
ईरान ने लिया बदला
ईरान ने गुस्से में 8 देशों पर मिसाइलें दाग ज्यादातर मिसाइलें रोक ली गई। सऊदी अरब ने कहा कि वह अब ईरान के खिलाफ अपनी सारी ताकत लगा देगा। कल तक गल्फ में जो गठबंधन नहीं था वो आज हो गया है क्योंकि ईरान ने सब पर एक साथ हमला कर दिया। इजरायल ने एक सुबह के सटीक हमलों से ईरान की कमांड व्यवस्था को हमेशा के लिए तोड़ दिया।
अमेरिका को पता था होने वाला है हमला
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इजरायल और अमेरिका की संयुक्त योजना पर विस्तार से रिपोर्ट दे दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों की खुफिया एजेंसियां लंबे समय से इंतजार कर रही थी कि ईरान के सीनियर राजनीतिक और मिलिट्री लीडर्स की एक साथ बैठक हो ताकि उन्हें एक साथ निशाना बनाया जा सके। शनिवार को तीन मीटिंग्स की जानकारी मिली और खामेनेई की लोकेशन भी पता चल गई। इसे अनोखा अवसर मानकर दिन के उजाले में हमला किया गया। इजरायली फाइटर जेट्स ने भी खामेनेई के कॉम्पलेक्स पर 30 बम गिराए। ट्रंप के ईरान द्वारा अमेरिकी टारगेट्स पर हमले की खुफिया जानकारी मिली थी इससे हमले का फैसला जल्दी हो गया।
क्या होगा मीटिंग में?
ईरान के बड़े नेता ही हर मीटिंग में एक ही सवाल उठ रहा है कि क्या इजरायल को भी इसकी खबर है थी कि यह कोई साधारण मिलिट्री ऑपरेशन नहीं था। यह ईरान की सरकार के अंदर भरोसे की पूरी तरह खत्म करना था। हर जनरल अब सोचेगा कि उसके साथ बैठने वाला कौन इजरायल को बात रहा था।
यह हमला सिर्फ बमों का नहीं था। यह ईरान की पूरी लीडरशिप के मन में डर पैदा करने का था। अब वो कभी भी पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएंगे। इजरायल ने यह दिखा दिया है कि उनकी जासूसी कितनी गहरी है। उनका धैर्य कितना लंबा है। यह एक नया चैप्टर है मिडिल ईस्ट के इतिहास में।