नई दिल्लीः ईरान में 2 सप्ताह से अधिक समय से जारी हिंसक प्रदर्शनों को लेकर सकंट गहराने शुरू हो गए है। दरअसल, ईरान में मौजूदा जन-आंदोलन को 2009 और 2022 के बाद का सबसे बड़ा विरोध माना जा रहा है। धार्मिक सत्ता के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर हैं। सुरक्षा बलों की सख्ती और कई इलाकों में झड़पों के चलते स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। सरकार ने देशभर में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है, जिससे विदेशी नागरिकों का अपने परिवारों और दूतावासों से संपर्क भी प्रभावित हुआ है।

वहीं ईरान में बढ़ रही हिंसा को लेकर भारत सरकार ने अपने नागरिकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे मौजूदा सुरक्षा हालात को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द वहां से बाहर निकलने की व्यवस्था करें। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ईरान में सुरक्षा स्थिति तेजी से बदल रही है। ऐसे में वहां मौजूद छात्र, तीर्थयात्री, कारोबारी और पर्यटक जो भी साधन उपलब्ध हो (जैसे कमर्शियल उड़ानें), उनका उपयोग कर सुरक्षित रूप से देश से बाहर निकल आएं।
कहा गया है कि सभी भारतीय नागरिक अपना पासपोर्ट, पहचान पत्र और इमिग्रेशन से जुड़े कागजात हर समय अपने पास तैयार रखें। नागरिकों को किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शन, भीड़भाड़ वाले स्थानों और अशांत क्षेत्रों से दूर रहने को कहा गया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। किसी भी आपात स्थिति में नागरिक तुरंत दूतावास से संपर्क करें।
ऐसे में सवाल है कि ईरान में कितने भारतीय फंसे हैं, उन्हें सुरक्षित निकालना कितना मुश्किल है और इस पूरे ऑपरेशन में सरकार को कितना खर्च उठाना पड़ सकता है। सरकारी और दूतावास से जुड़े आकलनों के मुताबिक ईरान में लगभग 10 से 12 हजार भारतीय नागरिक रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, खासकर मेडिकल और धार्मिक अध्ययन से जुड़े छात्र शामिल हैं। इसके अलावा छोटे कारोबारी, तकनीकी पेशेवर और कुछ पर्यटक भी शामिल हैं। संकट के समय यह विविध समूह सरकार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाता है।