ऊना/ सुशील पंडित : उपमडल बंगाणा क्षेत्र की मोममनयार पंचायत के तहत श्री अमृतेश्वर शिव मंदिर खुरवाई में महाशिवपुराण कथा के सातबें दिन स्वामी जितेंद्र मोहन महाराज ने कहा कि बेटियां मां ताप्ती जैसा तप स्वयं में रखें और खुद किसी के धर्म में जाने के बजाय किसी के द्वारा ऐसी कोशिश करने पर उसे अपने धर्म में लाने की ताकत रखें। अपने सनातन धर्म को छोड़कर हम कहीं नहीं जाएं। मां ताप्ती ने भी स्वयं कोई परीक्षा नहीं दी और न तप किया बल्कि राजा स्वर्ण को उन्हें पाने के लिए तप करना पड़ा, परीक्षा देनी पड़ी । उन्होंने कहा कि अपने घर में रूखी सूखी जैसी भी रोटी मिले उसे खा कर गुजारा करो पर दूसरों के घर में जाकर उनकी जूठन मत खाओ ।दूसरे धर्म में आने के लिए पहले को प्रलोभन मिलेंगे, कुछ दिन खूब खातिरदारी होगी ,लेकिन फिर कोई नहीं पूछेगा। इसलिए बेटियां इसे लेकर खासतौर से सचेत रहें।
स्वामी जितेंद्र मोहन ने बेटी और पिता का भावुक को प्रसंग सुनाया। जिससे सभी भक्तों की आंखें नम हो गई। उन्होंने कहा कि बेटी जिस दिन से जन्म लेती है, उसी देना से पिता उसके विवाह के लिए जोड़ना शुरु कर देते हैं। हैसियत न होने के बावजूद बेटी की हर इच्छा पूरी करते हैं। बेटी का कन्यादान उनकी सबसे बड़ी तमन्ना होती है। बेटी का जब विवाह होता है तो भी उसके सामने तक नहीं आ पाते और यहां वहां छुपकर रोते रहते हैं ऐसे में यदि बेटी उनकी मर्जी के बगैर अपनी मनमर्जी से विवाह कर ले तो उन्हें कितना दुख होगा, वह किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाते हैं। इस मौके पर कथा आयोजित संजीव कुमार शर्मा ,लक्ष्य एकेडमी डायरेक्टर खुरवाई रिटायर्ड कर्नल तरसेम चंद राणा, समाजसेवी एवं उद्योगपति महालक्ष्मी इंडस्ट्री अंबेहडा योगराज जोगी, पूर्व प्रधान जगदीश शर्मा व बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।