बद्दी के 90 फीसदी ग्रामीण लोगों को निगम बनने का होगा नुकसान ; बलविंद्र
केवल धारा 118 के नियमों का लाभ लेने के मकसद से बिल्डर व उद्यमी कर रहे इसकी पैरवी
बददी/सचिन बैंसल: नगर परिषद बददी का दायरा बढ़ाकर उसको नगर निगम बनाने पर ग्रामीण लोगों ने आपत्ति जताई है। ग्रामीणों ने कहा कि नगर परिषद बददी सिटी को नगर परिषद निगम बनाया जाए तो कोई बात नहीं लेकिन उसमें नए ग्रामीण क्षेत्र को शामिल न किया जाए। प्रदेश सरकार द्वारा बद्दी नगर परिषद को निगम में बदलने के प्रस्ताव को अब स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना होगा। क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों ने मंगलवार को एक मंच पर लामबंद होकर एक स्वर में बद्दी निगम के प्रस्ताव का विरोध किया और कहा है कि अगर प्रदेश सरकार द्वारा जबरन बद्दी को निगम थोपा जाता है और हमारी पंचायतों को शामिल कर लिया जाता है तो उसका विरोध सरकार को सडक़ों पर देखने को मिलेगा। क्षेत्र की जनता इसका पुरजोर विरोध कर रही है और सरकार ने फिर भी यह प्रस्ताव वापस नहीं लिया तो स्थानीय लोग एकत्र होकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। झाड़माजरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान समाजसेवी व जनप्रतिनिधि बलविंद्र ठाकुर ने कहा कि निगम में पंचायतों को शामिल करने से ग्रामीण क्षेत्र के 90 फीसदी लोगों को इसका सीधा सीधा नुकसान होगा। क्षेत्र में 90 फीसदी जमीन लोगों की कृषि योग्य जमीन है। इस जमीन पर मिलने वाली सब्सिडी बंद हो जाएगी। गांव की छोटी छोटी सडक़ों पर अचानक सैंकड़ों वाहन आ जाएंगे और लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होगा। क्षेत्र में आबादी बढ़ जाएगी। बलविंद्र ठाकुर सहित करीब पांच पंचायतों के प्रतिनिधियों ने कहा कि बद्दी को निगम बनाने के पीछे केवल एकमात्र मकसद धारा 118 के तहत उद्यमियों व बिल्डरों को लाभ देना है। बद्दी को निगम मिलने से कोई विकास नहीं मिलने वाला बल्कि उन्हें कई तरह के टैक्स का सामना करना होगा। इसमें उद्यमियों को भी उल्टा दो फीसदी इलेक्ट्रिसिटी व स्टांप का टैक्स देना होगा। प्रापर्टी टैक्स देना होगा।