चंडीगढ़, 12 फरवरी 2026: पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कथित US-India ट्रेड डील को लेकर केंद्र की BJP सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता पंजाब के किसानों, भारतीय कृषि व्यवस्था और देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के खिलाफ एक गहरी राजनीतिक और आर्थिक साजिश है।
पार्टी कार्यालय में आयोजित विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंत्री ने कहा कि यदि सस्ते अमेरिकी दूध पाउडर, चीज़, गेहूं, मक्का और अन्य कृषि उत्पाद भारतीय बाजारों में कम कीमत पर आने लगते हैं, तो इसका सीधा असर देश के किसानों पर पड़ेगा। “किसान कहां जाएंगे? पंजाब का अन्नदाता किसके भरोसे रहेगा?” उन्होंने सवाल उठाया।
पंजाब का राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में योगदान
मंत्री ने कहा कि पिछले लगभग 50 वर्षों से पंजाब के किसानों ने देश की राष्ट्रीय खाद्य भंडारण प्रणाली को मजबूत किया है। गेहूं और धान की आपूर्ति के जरिए पंजाब ने भारत की खाद्य सुरक्षा में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश के किसान पहले ही लागत और बाजार की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जैसी नीति उनके लिए विनाशकारी साबित हो सकती है।
टैरिफ संरचना और असमान व्यापार
हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में शुल्क जारी रहता है और दूसरी ओर अमेरिकी उत्पादों पर भारत में शुल्क घटाया जाता है, तो यह असमान व्यापारिक समझौता होगा।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और टैरिफ ढांचे की निगरानी World Trade Organization (WTO) द्वारा की जाती है, जहां सदस्य देशों के बीच व्यापारिक प्रतिबद्धताओं का विवरण उपलब्ध है।
अमेरिकी व्यापार नीतियां और टैरिफ संरचना Office of the United States Trade Representative (USTR) द्वारा निर्धारित की जाती हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव
मंत्री ने कहा कि सस्ते आयात से भारतीय डेयरी उद्योग, छोटे किसान और मंडी आधारित कृषि प्रणाली प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इसे भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर सीधा हमला बताया।
भारत के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और आयात-निर्यात नीतियों की निगरानी Ministry of Commerce and Industry द्वारा की जाती है, जहां आधिकारिक नीति दस्तावेज उपलब्ध हैं।
अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी पर प्रतिक्रिया
मंत्री ने अमेरिकी कृषि अधिकारियों द्वारा दिए गए सार्वजनिक बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि इस समझौते से अमेरिकी किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा है, तो भारतीय किसानों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग
हरपाल सिंह चीमा ने मांग की कि US-India ट्रेड डील के सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि देश के किसान और नागरिक सच्चाई जान सकें। उन्होंने इसे पारदर्शिता का प्रश्न बताया।
खुली बहस की चुनौती
वित्त मंत्री ने कहा कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि तथ्य सामने रखे जाएं, तो स्पष्ट हो जाएगा कि यह समझौता भारतीय किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हित में नहीं है।
उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाब के लोग अपने अन्नदाता के सम्मान और भविष्य से समझौता नहीं होने देंगे और इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाया जाएगा।
