चंडीगढ़ः रिटायर्ड सैनिकों के इलाज के लिए बनाई गई एक्स सर्विसमेन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। इस मामले में सीबीआई ने सेक्टर-38 के मंथन हेल्थ केयर, सेक्टर-15 के धर्म अस्पताल और सेक्टर-19 के केयर पार्टनर हार्ट सेंटर समेत 8 के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। मिली जानकारी के अनुसार निजी अस्पतालों में मरीजों को गलत तरीके से रेफर कर बिना भर्ती किए ही लाखों रुपए के फर्जी बिल पास करवाने के मामले में सीबीआई ने 2 डॉक्टरों और बिलिंग क्लर्कों के खिलाफ यह कार्रवाई की है।
सीबीआई को जांच के दौरान पता चला है कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड मंथन हेल्थ केयर के डायरेक्टर डॉ. विकास शर्मा और डॉ. रिंपल गुप्ता थे। यह हेल्थ सेंटर खुद ईसीएचएस के दायरे में नहीं आता था, इसलिए इनके निदेशकों ने मोटी कमाई के लालच में अन्य अस्पतालों को भी अपने गिरोह का हिस्सा बनाया। सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में डॉक्टर विकास शर्मा, डॉक्टर रिम्पल, केयर पार्टनर हार्ट सेंटर के बिल क्लर्क मंजीत सिंह और बिलिंग क्लर्क परवीन और मंजीत को नामजद किया गया है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस फर्जीवाड़े के लिए निजी अस्पतालों द्वारा ईसीएचएस की फर्जी मोहरें तक बनवाई गई थीं।
इन्हीं मोहरों के जरिए रेफरल स्लिप तैयार कर मरीजों को कागजों में भर्ती दिखाया जाता था। सीबीआई की टीमों ने एसीबी इंस्पेक्टर पवन कुमार के नेतृत्व में करीब 48 घंटे तक लगातार छापेमारी की। इस दौरान चंडीगढ़ और मोहाली के 7-8 निजी अस्पतालों से ईसीएचएस से जुड़े रिकॉर्ड, मरीजों की फाइलें और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए गए।
जांच एजेंसी ने सेक्टर-15 स्थित धर्म अस्पताल, सेक्टर-38 स्थित मंथन हेल्थकेयर के अलावा शेल्बी, केयर पार्टनर, अमर अस्पताल, ईडन और वन-एच प्लस मेडपार्क मोहाली सहित अन्य अस्पतालों में रेड की। सीबीआई अब जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की गहन जांच कर रही है। इन रिकॉर्ड को ईसीएचएस के डेटा से मिलाया जाएगा। यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अस्पताल संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्राईसिटी में ईसीएचएस से इम्पैनल्ड सभी निजी अस्पतालों की बिलिंग फिलहाल रोक दी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।