नई दिल्ली: पीएम मोदी ने मन की बात कार्यक्रम का 137वां एपिसोड रखा। इस दौरान उन्होंने देशवासियों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा भी की। पीएम ने युवाओं को इतिहास के बारे में ज्ञान लेने के लिए WWW.BHARATRAJYA.COM वेबसाइट पर जाने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इस वेबसाइट पर जाकर आप कोई भी एक साल चुन सकते हैं। इससे आपको यह पता चल जाएगा कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसने और कब शासन किया था।
बता दें कि इस वेबसाइट को मुंबई के रहने वाले कृष्णा शेषाद्री ने बनाया है। पीएम ने कहा कि कृष्ण शेषाद्री की यह कोशिश सिर्फ ऐसे छात्रों के लिए फायदेमंद होगी जो इतिहास पढ़ना चाहते हैं बल्कि इससे छात्रों को इतिहास को अलग तरीके से सीखने में भी मदद मिल पाएगी।
पूरे देश में तेजी से चल रहा नशा मुक्त अभियान
पीएम ने कहा कि नशामुक्त युवा फॉर विकसित भारत इस समय यह अभियान पूरे देश में बहुत ही तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। इसका लक्ष्य भी बिल्कुल साफ है कि नशामुक्त युवा ड्रग फ्री इंडिया। बहुत से लोग खासतौर पर युवा इसका हिस्सा बन रहे हैं। भारत की युवाओं की सेहत, खुशी और अच्छे भविष्य के लिए यह हमारा सामूहिक संकल्प है। पीएम का कहना है कि बहुत से युवा नशे में फंस रहे हैं ऐसे में उनके परिवार को कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में हमें उन युवाओं को संभालना पड़ेगा।
Mission ShaktiSAT में छात्राओं को मिल रहे मौके
पीएम मोदी ने यह भी बताया कि Mission ShaktiSat के जरिए से 108 देशों के 12 हजार छात्राओं की सैटेलाइट टेक्नोलॉजी सीखने और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे के मौक पर भी इस मिशन की एक खास झलक ग्रेटर नोएडा में देखने को मिली।
छोटा सा शौक जीवन में खोलता है कई रास्ते
पीएम ने यह कहा है कि कभी-कभी हमारा एक छोटा सा शौक भी जीवन में बड़ी संभावनाओं के रास्ते खोल देता है। नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरी जी की यात्रा भी कुछ ऐसी ही थी। वेसालु जी का पालन पोषण किसान परिवार में हुआ था। बचपन में उन्होंने अफने माता-पिता को खेती करते भी देखा था और उनको खुद भी फूलों के साथ बहुत लगाव था।
साल 2021 में उन्होंने इस शौक के साथ ही छोटे स्तर पर फूल उगाने की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे उन्होंने इसमें ऐसी संभावना दिखाई और फिर उन्हें अपने इस शौक को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है।
स्वच्छता अभियान को मिली नई पहचान
इसके अलावा पीएम ने कहा कि जब स्वच्छता हर नागरिक की व्यक्तिगत प्रतिबद्धता बनती है तो उसका असर सिर्फ आस-पास की सफाई ही नहीं बल्कि पूरी जगह की पहचान और चरित्र को भी बदल सकता है।