पंचकूला: शहर से एक बड़ी खबर सामने आई है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। एसीबी अब उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। अदालत ने अंतरिम जमानत देते हुए उनको जांच में शामिल होने के आदेश दे दिए हैं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी।
6 फरवरी को गिरफ्तारी से बचने के लिए जोगिंद्र शर्मा ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इस पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रमजीत अरोड़ा की अदालत में 11 फरवरी को सुनवाई हुई है। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील दीपांशु बंसल ने दलील दी कि एसीबी के पास कोई भी ऐसा ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो पाए कि इस केस में जोगिंद्र शर्मा की कोई भूमिका है।
वकील ने कहा कि पीसी एक्ट की धारा 7A की अनुमति भी एसीबी के पास नहीं है। डिस्क्लोजर रिपोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है और न ही रिश्वत की मांग, स्वीकृति या रिकवरी का कोई प्रमाण है। वहीं एसीबी की ओर से सरकारी वकील ने जोगिंद्र शर्मा को मुख्य साजिशकर्ता बताया है। दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद कोर्ट ने डीआरओ जोगिंद्र शर्मा को अंतरिम जमानत दे दी। उन्हें जांच में शामिल होने के निर्देश दिए हैं।
एसीबी के द्वारा गिरफ्तार किए गए तहसीलदार विक्रम सिंगला के मामले में विभागीय जांच शुरु हो गई है। एसडीएम चंद्रकंत कटारिया ने कमिश्नर अंबाला को पत्र लिखकर सार्वजनिक डीलिंग से जुड़े पदों पर छह महीने से ज्यादा समय से जमे हुए कर्मचारियों के तबादले की सिफारिश की गई है।
कमिश्नर ने भी डीसी पंचकूला को पत्र लिखकर सरकार के आदेशानुसार कार्रवाई करने को कहा है। अब संबंधित कर्मचारियों के तबादले की तैयारी चल रही हैं। इसके अलावा विभाग ने तहसीलदार विक्रम सिंगला से जुड़े सभी रिकॉर्ड भी तलब किए हैं। रजिस्ट्री गवाहों की सूची और बाकी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। एक हफ्ते में रिकॉर्ड उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
