एक्शन में आई टीम ने शुरू की जांच
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिला में मेडिकल कॉलेज एक बार फिर सुर्खियों में है। ऑर्थो वार्ड-2 का एक वीडियो सामने आया है, इसमें तीन कुत्ते बेड पर आराम से लेटे हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो दो दिन पुराना बताया जा रहा है। इसे वार्ड में भर्ती एक मरीज के तीमारदार ने बनाया है। इससे पहले इसी वार्ड में चूहों का वीडियो भी सामने आया था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कई गंभीर मरीज घायल अवस्था में वार्ड में भर्ती हैं। इन्हीं मरीजों के बगल में पड़े खाली बेड पर एक नहीं, बल्कि तीन कुत्ते आराम फरमा रहे हैं।
इस पूरे मामले पर गोंडा मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर धनंजय श्रीकांत कोटस्थाने ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कुत्तों को पकड़ने के लिए गोंडा नगर पालिका विभाग को कई बार पत्र लिखा है, लेकिन उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रधानाचार्य ने यह भी बताया कि साफ-सफाई का काम देखने वाली कंपनी को भी इस लापरवाही के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
वहीं अब कुत्तों के वायरल वीडियो के बाद शासन द्वारा गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी सोमवार को कॉलेज पहुंची। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशक डॉ. संदीपा श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने सबसे पहले ऑर्थो वार्ड का निरीक्षण किया। यहां जांच टीम ने वायरल वीडियो को लेकर भर्ती मरीजों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। निरीक्षण के दौरान ऑर्थो वार्ड में लगा एक बिजली का बोर्ड खराब मिला। इस पर निदेशक ने हल्के अंदाज में कहा कि यह बोर्ड तो ₹10 में बन जाएगा, इसे तुरंत ठीक कराना होगा।
उन्होंने पास के बेड पर भर्ती मरीज को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा कि जब तक बोर्ड ठीक न हो जाए, इसका इस्तेमाल न करें, क्योंकि करंट लग सकता है। इसके बाद टीम दूसरे ऑर्थो वार्ड में पहुंची। यहां मरीजों से पूछा गया कि क्या उन्हें चूहों, कुत्तों या बिल्लियों से कोई परेशानी होती है और वार्ड की साफ-सफाई को लेकर उनकी क्या राय है।
निरीक्षण के बाद जांच कमेटी ने मेडिकल कॉलेज के अन्य वार्डों का भी एक-एक कर जायजा लिया और मरीजों को दी जा रही सुविधाओं की समीक्षा की। इस दौरान कई व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश भी दिए गए। वार्ड निरीक्षण के बाद टीम मेडिकल कॉलेज परिसर में बनी नई बिल्डिंग पहुंची। यहां पुरानी बिल्डिंग के वार्डों को नई इमारत में शिफ्ट करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई और आवश्यक निर्देश दिए गए।
पूरे निरीक्षण के दौरान मीडिया कर्मियों को सुरक्षा गार्डों ने वार्डों में जाने से रोक दिया। किसी भी पत्रकार को जांच टीम के साथ अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली। इसे लेकर जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे। वहीं, चूहों और कुत्तों के वायरल वीडियो को लेकर जांच में क्या निष्कर्ष निकले, इस पर भी टीम ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।