चंडीगढ़ः यूटी के अलग-अलग सेक्टरों में लोगों द्वारा अवैध रूप से कब्ज़े किए गए है। वहीं चंडीगढ़ प्रशासन कब्ज़ों को हटाने का काम कर रहा है। हाउसिंग बोर्ड की ओर से डिमोलिशन ड्राइव शुरू किया। इस दौरान भारी पुलिस बल के साथ टीम सेक्टर-45 पहुंची। यहां पर जिन लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है या बिना अनुमति घर में बदलाव किए हैं, कर्मचारी उनके छतों पर चढ़े और हथौड़ों से अवैध निर्माण को तोड़ दिया। सेक्टर-45 में 4 मकानों में तोड़फोड़ की गई। इस दौरान लोगों ने इसका विरोध किया। पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई 9 सेक्टरों में की जाएगी। घटना स्थल पर लोगों द्वारा जमकर हंगामा किया गया, लेकिन प्रशासन द्वारा कार्रवाई जारी रही। प्रशासन का कहना है कि अवैध कब्जों को लेकर इससे पहले मीडिया के माध्यम से लोगों सूचित भी किया था कि जिन्होंने अवैध कब्ज़े किए हैं, वे या तो स्वयं इन्हें हटा लें, नहीं तो उन अवैध कब्ज़ों के ऊपर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न बैठे हों। लेकिन लोगों का कहना हैकि उन्होंने यह यह एक दो माह में नहीं बनाए। उन्हें यहां पर रहते हुए 15 से 20 साल हो चुके हैं। उस दौरान प्रशासन द्वारा मकानों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी। लोगों ने कहा कि आज इतने सालों तक हम अपने आशियाने बनाकर बैठे थे जिन पर कार्रवाई की जा रही है।
लोगों का कहना था कि भूमि नीति (need base policy) बनाने की बातें भी काफी समय से हो रही थीं, लेकिन अगर ऐसी कोई नीति पहले बना दी जाती तो लोगों की इतनी मेहनत की कमाई इन इमारतों में बेकार ना जाती। बता दें कि 21 अप्रैल 2022 को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा था कि जिन लोगों ने घर के पिलर, फाउंडेशन या बालकनी हटाकर मकान कमजोर किया है, वे इसे एक महीने के अंदर ठीक करें और सभी मकानों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हाईकोर्ट ने आगे कहा था कि अगर हाउसिंग बोर्ड मरम्मत करवाता है, तो उसका पूरा खर्च घर के मालिकों (अलॉटियों) से ही लिया जाएगा। सेक्टर 41-A, 41-D, 45-A, 45-C, 45-D, 46, 47-C, 39-B और 29-B के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जिन लोगों ने नोटिस के बावजूद स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट जमा नहीं किया, उनके खिलाफ अब सख्त कार्रवाई होगी।