चंडीगढ़: शुगर से पीड़ित व्यक्ति के पैर पर लगी एक छोटी-सी चोट धीरे-धीरे गंभीर चिकित्सकीय आपात स्थिति का रूप धारण कर सकती है। नसों को नुकसान पहुंचने के कारण दर्द महसूस करने की क्षमता कम हो जाती है, जिसके चलते चोट का पता लगना मुश्किल हो जाता है।
38 वर्षीय राजा को भी इसी तरह के खतरे का सामना करना पड़ा। डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण उन्हें पैर पर हुए घाव का कोई अहसास ही नहीं हुआ, जो बाद में गंभीर संक्रमण में बदल गया और स्थिति हड्डी तक संक्रमण पहुंचने तक जा पहुंची। ऐसी स्थिति में समय पर सर्जरी करना आवश्यक हो गया।
एक अन्य लाभार्थी 57 वर्षीय वीना का रक्त संचार खराब होने के कारण घाव भरना मुश्किल हो गया था। उनका अल्सर इस हद तक बढ़ गया था कि पैर काटने की नौबत आने का खतरा पैदा हो गया था। संक्रमित ऊतकों को हटाने के लिए सर्जरी करनी पड़ी।
बाकी मामलों में लंबे समय तक ड्रेसिंग और एंटीबायोटिक उपचार, टो और फुट सर्जरी, घुटने से नीचे वाले हिस्से से संबंधित प्रक्रियाएं, स्किन ग्राफ्टिंग, सी.टी. स्कैन और एम.आर.आई. जैसी इमेजिंग जांचें, रक्त और प्लेटलेट्स के ट्रांसफ्यूजन के अलावा डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, गंभीर सेप्सिस और एनीमिया जैसी गंभीर स्थितियों का उपचार भी शामिल था।