पंचकूलाः हरियाणा के 504 करोड़ रुपए के बैंकिंग घोटाले में सीबीआई कोर्ट में 19 आरोपियों के खिलाफ CBI ने तीसरी चार्जशीट दाखिल की गई है। सीबीआई की चार्जशीट में IDFC फर्स्ट बैंक के 3 अधिकारी, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक अधिकारी भी शामिल है। 19 आरोपियों में 6 आईएएस अधिकारियों के नाम शामिल हैं। मिली जानकारी के अनुसार अधिकारियों से 20 करोड़ रुपए का सोना भी जब्त किया गया है। सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों ने मिलकर हरियाणा सरकार के वित्त विभाग के नियमों को ताक पर रखा।
8 सरकारी विभागों के करोड़ों रुपये उन बैंक शाखाओं में ट्रांसफर करवाए गए, जहाँ आरोपी बैंक अफसर तैनात थे। इसके साथ ही हरियाणा सरकार के 9 अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी नामजद किया गया है। इस मामले में अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और 3 IAS अधिकारियों समेत 26 की गिरफ्तारी हो चुकी है। दरअसल, सरकारी खातों में जमा रकम को फर्जी तरीके से तीसरे पक्षों (थर्ड पार्टी) के बैंक खातों में भेजा गया, जिनका विभागों से कोई लेना-देना नहीं था। इसके बाद पैसों को कई अलग-अलग खातों में घुमाकर (लेयरिंग) अंत में कैश के रूप में निकाल लिया गया और अवैध रूप से आपस में बांटा गया। मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने अब तक 54 अलग-अलग स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है।
इस दौरान 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना और कई अहम आपत्तिजनक दस्तावेज व साक्ष्य जब्त किए जा चुके हैं। शुरुआत में यह जांच हरियाणा विजिलेंस (एंटी करप्शन ब्यूरो) के पास थी, जिसे बाद में सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई इसके साथ ही चंडीगढ़ नगर निगम (स्मार्ट सिटी लिमिटेड) और ‘क्रेस्ट’ (CREST) से जुड़े दो अन्य फंड गबन मामलों की जांच भी कर रही है, जिनमें पहले ही चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। सीबीआई के मुताबिक, गबन किए गए 504 करोड़ रुपये की पूरी ‘मनी ट्रेल’ (पैसा कहाँ-कहाँ गया) को खंगाला जा रहा है। अपराध से कमाई गई रकम से खरीदी गई संपत्तियों को अटैच करने और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच अभी जारी है।