मुंबई: 17 साल तक चल रही मालेगांव बम धमाके की लंबी कानूनी लड़ाई आज आखिर कार खत्म हो चुकी है। 29 सितंबर 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाके के केस में एनआईए की खास अदालत ने आज सभी सात के सात आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट के फैसले पर पीड़ित पक्ष ने अब नाराजगी भी जताई है। पीड़ित पक्ष डॉक्टर अंसारी का कहना है कि कोर्ट का फैसला हम मानते हैं परंतु हम आगे जाकर इस मामले में अपील जरुर करेंगे।
Justice delayed is Justice denied!
17 साल बाद मिला ये न्याय भी अन्याय है! जिंदगी के 17 साल का मतलब समझते हो मिलॉर्ड?
बहरहाल साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित एवं सभी राष्ट्रवादी साधकों को कृतज्ञ राष्ट्र का नमन! 🙏🙏#malegaonblastcase #SadhviPragya #ColPurohit #NIACourt #Justice pic.twitter.com/5YWxZyu3hl
— #SurgicalStrike 🇮🇳 (@SurgicalWay) July 31, 2025
इस धमाके में कई लोगों की जान गई थी। कई घायल भी हुए थे जिस समय यह ब्लास्ट हुआ था तो जो जख्मी थे उनकी हमने मदद की थी। इंसाफ की लड़ाई अभी चल रही है। इस मामले में बरी होने वालों की यदि बात करें तो बीजेपी सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और सेना के अधिकारी रहे लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित भी शामिल हैं। अदालत का कहना है कि जिस मोटरसाइकिल में धमाका हुआ। उसका मालिकना हक प्रज्ञा ठाकुर से जोड़ने का कोई भी पक्का सबूत नहीं था।
इसके अलावा कर्नल पुरोहित समेत बाकी आरोपियों पर लगाए गए आतंकवाद विरोधी कानून के अंतर्गत कार्रवाई करने में भी कानूनी प्रक्रिया की गलतियां मिली है। अदालत से बरी होने के बाद साध्वी प्रज्ञा का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि – मुझे 13 दिनों तक टॉर्चर किया गया है। 17 साल तक आतंकवादी बनाकर अपमानित किया गया। मेरा जीवन बर्बाद कर दिया गया। उनका बयान इस ओर इशारा करता है कि उन्होंने इस पूरे केस में राजनीति से प्रेरित माना है।
कैसे हुआ मालेगांव बम धमाका?
29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मोटरसाइकिल में विस्फोट हुआ था। इसमें 6 लोगों की मौत और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। जांच पहले महाराष्ट्र एटीएस ने की थी परंतु 2011 में केस को एनआईए के हवाले कर दिया गया। इस केस का ट्रायल 2018 में शुरु हुआ था। इस दौरान 323 गवाहों में से 34 गवाह अपने बयानों से पलट गए थे। अप्रैल 2025 में बहस पूरी हुई और 8 मई को फैसला सुरक्षित रखा गया। दस्तावेजों की बड़ी संख्या के कारण यह फैसला आज 31 जुलाई को सुनाया गया।