नई दिल्ली: भारत-अमेरिका ट्रेड डील के कुछ दिन पहले 27 फरवरी को भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच में व्यापार समझौता हुआ है। इस डील को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। इसके बाद अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील को फादर ऑफ डील कहा जा रहा है। इसी बीच भारत के अपने पड़ोसी और दुनिया की दूसरी बड़ी इकोनॉमी यानी की चीन के साथ भी व्यापार के रिकॉर्ड स्तर पहुंचने की रिपोर्ट्स सामने आ रही है।
चीन के साथ होगी भारत की डील
यूरोप और अमेरिका के साथ भारत की डील के बाद अब ऐसा बोला जा रहा है कि ऐसे ही डील यदि चीन से हो जाए तो क्या होगा। दोनों ही डील से भारत का व्यापार देश के पक्ष में है क्योंकि भारत अमेरिका और यूरोपीय यूनियन दोनों को आयात से ज्यादा निर्यात करता है। इस कारण दोनों पक्षों ने भारत के साथ ट्रेड डील करने की अहमियत दी है। कही न कहीं उन्हें भारत के साथ डील के लिए मजबूर होना होगा।
भारत-चीन में होगा व्यापार संतुलन
चीन के साथ व्यापार संबंध यूरोप और अमेरिका से बिल्कुल अलग तरीके के साथ होंगे क्योंकि चीन से आयात बहुत ज्यादा और निर्यात बहुत कम होता है। भारत में चीन के राजदूत जू फेईहोंग ने बीती दिन चीनी नववर्ष के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में घोषणा की है कि दोनों देशों के बीच व्यापार 155.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है जो कि पिछले साल की तुलना में 12 प्रतिशत ज्यादा है। राजदूत ने कहा कि व्यापार में यह वृद्धि भारत-चीन संबंधों में सुधार के साफ संकेत है।
राजदूत ने कहा कि भारत से चीन को निर्यात में 9.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरु हो गई है। इसमें लगभग 20,000 भारतीय तीर्थ यात्री शामिल हुए हैं। चीन ने भारतीय नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से जारी करना शुरु कर दिया है। इतना ही नहीं दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरु हो चुकी हैं इससे लोगों के बीच में आवाजाही बढ़ेगी।
चीनी राजदूत ने कही ये बात
जू फेइहोंग ने कहा कि अगस्त 2025 में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पीएम नरेंद्र मोदी को तियानजिन में सफल मुलाकात ने भारत-चीन संबंधों को रीसेट और फ्रेश स्टार्ट किया है। उन्होने जोर दिया है कि दोनों देश एक-दूसरे के साथ हैं। इसके अलावा चीनी राजदूत ने भारत की इस साल ब्रिक्स अध्यक्षता का भी समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि – चीन ब्रिक्स के जरिए बहुपक्षीय समन्वय मजबूत करने और ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए तैयार है।
भारत चीन व्यापार में रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद भारत की ओर से कुछ चिंताएं बनी हुई हैं क्योंकि द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन हैं। चीन का निर्यात भारत की तुलना में काफी ज्यादा है। भारतीय पक्ष ने चीन के बाजारों में पर्याप्त पहुंच की कमी खासतौर पर उर्वरक, रेयर अर्थ और टनल बोरिंग मशीनरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता जताई है।
वीजा फ्री नीति का हो रहा विस्तार
कुछ रिपोर्ट्स की मानें तो 2025 में भारत का व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया जो रिकॉर्ड स्तर का है। चीनी राजदूत ने कहा कि चीन न सिर्फ विश्व का कारखाना बल्कि विश्व बाजार भी बनना चाहता है। चीन का टैरिफ स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों से कम (7.3 फीसदी) है। विदेशी निवेश की नेगेटिव लिस्ट छोटी हो रही है और वीजा फ्री नीति का विस्तार हो रहा है।
