भारी भीड़ ने Launching में दिखाया उत्साह
वॉशिंगटनः अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने आज 2 अप्रैल को ‘आर्टेमिस-2’ मिशन लॉन्च किया। सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से ये लॉन्चिंग हुई। साल 1972 में ‘अपोलो-17’ के बाद यह पहला मौका है जब कोई इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा को पार कर चांद के करीब पहुंचेगा। चारों यात्री स्पेसक्राफ्ट से चांद के चारों ओर चक्कर लगाएंगे और फिर धरती पर लौटेंगे। यह मिशन 10 दिन का है। टेक-ऑफ से ठीक एक घंटा पहले ‘लॉन्च अबॉर्ट सिस्टम’ में कुछ ऐसी दिक्कतें आईं, जिनसे लॉन्चिंग पर खतरा मंडराने लगा था। यह रॉकेट का वो ‘इमरजेंसी एग्जिट’ है, जो खराबी आने पर एस्ट्रोनॉट्स वाले हिस्से को तुरंत रॉकेट से अलग कर देता है।
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हालांकि इंजीनियरों ने इस समस्या को तेजी से सुलझा लिया। फिर सेफ्टी चेक के लिए काउंटडाउन घड़ी को 10 मिनट पर रोक दिया गया। इसके बाद रॉकेट के अलग-अलग जरूरी सिस्टम्स की जिम्मेदारी संभाल रहे इंजीनियरों की ‘ओके’ रिपोर्ट आई। फिर क्रू को संदेश मिला- “आर्टेमिस II, मैं लॉन्च डायरेक्टर बोल रहा हूं, आप उड़ान के लिए तैयार हैं।” कमांडर रीड वाइजमैन ने जवाब दिया, “हम पूरी मानवता की खातिर जा रहे हैं।” इसके तुरंत बाद चार RS-25 इंजन और दो रॉकेट बूस्टर चालू हुए और एस्ट्रोनॉट रवाना हो गए।
कुछ देर के लिए सिग्नल में आई थी रुकावट
उड़ान के करीब 51 मिनट बाद जब सैटेलाइट्स का हैंडओवर हो रहा था, तब ओरियन कैप्सूल का संपर्क कुछ देर के लिए टूट गया था। नासा के चीफ जेरेड इसाकमैन ने बताया कि मिशन कंट्रोल की आवाज तो क्रू को सुनाई दे रही थी, लेकिन क्रू का जवाब नीचे नहीं पहुंच पा रहा था। हालांकि, अब इस समस्या को सुलझा लिया गया है और सिस्टम सही काम कर रहा है। पायलट विक्टर ग्लोवर ने करीब एक घंटे तक ओरियन कैप्सूल की ‘टेस्ट ड्राइव’ की। यह पहली बार था जब किसी ने इस कैप्सूल को मैनुअली कंट्रोल किया।