पटियालाः डबवाली क्षेत्र के गांव राजपुरा क्षेत्र में बीते समय के सैर-सपाटा केंद्र ‘काला तित्तर’ के पास भाखड़ा नहर की मुख्य शाखा में करीब 20 से 25 फीट चौड़ी दरार आ गई। जिसके कारण आसपास के दर्जनों एकड़ खेतों में फीट पानी भर गया। इस दरार के कारण किसान तरसेम सिंह के खेत में पानी आ गया। सूचना मिलने पर राजपुरा और आबूब शहर क्षेत्रों के किसानों में भगदड़ मच गई। बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुंचे और मोर्चा संभालते हुए अपने स्तर पर राहत कार्य शुरू कर दिए। किसानों का कहना है कि नहर की सफाई लंबे समय से नहीं हुई थी और ऊपर से पानी की मात्रा भी ज्यादा छोड़ दी गई थी, जिससे दबाव बढ़ने के कारण नहर में यह दरार आ गई।
उन्होंने कहा कि खेतों में पानी घुसने से फसलों को भारी नुकसान होने की संभावना है। किसानों का आरोप है कि सूचना के बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे। सैकड़ों किसानों और अन्य लोगों ने खुद मिट्टी और अन्य साधनों की मदद से नहर में आई दरार को भरने की कोशिश की गई, जबकि विभाग की कार्रवाई सिर्फ पानी रोकवाने तक ही सीमित रही।
किसान नेता मिट्ठू कंबोज ने बताया कि नहर में जगह-जगह झाड़ियां उगी हुई हैं और किनारों की सफाई ना होने के कारण किनारे कमजोर हो चुके हैं। इसके अलावा चूहों और अन्य जानवरों द्वारा किनारों में बनाए गए छेद दरार का बड़ा कारण बने हैं। बताया जाता है कि भाखड़ा नहर की यह मुख्य शाखा लगभग 1983-84 के वक्फे में बनाई गई थी और अब इसका ढांचा काफी बेहाल स्थिति में है। लंबे समय से मुरम्मत और रख-रखाव न होने के कारण नहर के किनारे कमजोर पड़ गए हैं। इस मामले में सिंचाई विभाग के एसडीओ सोहनु कुमार और जेई रोहित से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन काल रिसीव नहीं किया।
पीड़ित किसानों ने सरकार से खराब हो चुकी फसलों का उचित मुआवजा देने की मांग की है। किसानों का कहना है कि खेतों में कई फीट पानी भरने से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने गिरदावरी करवा कर तुरंत मुआवजे की मांग की है। दूसरी ओर सिंचाई विभाग सिरसा के निगरान इंजीनियर राजेश बिश्नोई ने बताया कि वह अदालत की पेशी के लिए पंचकूला गए हुए हैं। उन्हें माना कि नहर में दरार पड़ने की उन्हें सूचना मिली है। उन्होंने एसडीओ और फील्ड स्टाफ को मौके पर पहुंच कर पाड़ को ठीक करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नहर के खराब हालत को देखते हुए इसकी पुन: मुरम्मत का प्रस्ताव विभाग पहले ही वर्ल्ड बैंक को भेज चुका है।