नई दिल्लीः ईरान-इजरायल जंग की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए हालातों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। वहीं इसका असर भारत में एलपीजी गैस की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। मुंबई में गैस भारी किल्लत के कारण 20 प्रतिशत होटल बंद हो गए है। देश के कई राज्यों में गैस की किल्लर हो रही है, जिसकी वजह से केंद्र सरकार ने नियम लागू कर दिए हैं। हालांकि घरेलू इस्तेमाल की गैस में कोई किल्लत नहीं आ रही, लेकिन कमर्शियल गैस सलेंडर की भारी किल्लत है। लोग एलपीजी गैस सिलेंडर की जमाखोरी न करें और एलपीजी की आपूर्ति बाधित न हो इसके लिए केंद्र सरकार ने वस्तु अधिनियम (ईसी एक्ट) ESMA लागू कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना और काले बाजारी गतिविधियों पर रोक लगाना है।
सूत्रों के अनुसार, ईसीए लागू होने के बाद प्राथमिक सेक्टर्स को एलपीजी और अन्य ईंधन की सप्लाई में विशेष प्रायोरिटी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अस्पताल, स्कूल, सरकारी संस्थान और अन्य महत्वपूर्ण सेक्टरों को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई थी। ऐसे में ईएसएमए का लागू होना संकट से निपटने और आम जनता को राहत देने का बड़ा कदम है। सरकार ने घरेलू रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘एस्मा’ कानून के तहत तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
इस कदम का उद्देश्य पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटना है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की एलपीजी खपत 3.13 करोड़ टन रही, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन का उत्पादन घरेलू स्तर पर किया गया था और शेष की मात्रा आयात पर निर्भर थी। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का 85-90 प्रतिशत LPG आयात सऊदी अरब और अन्य देशों से करता है, जो अपने मार्ग के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं। ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच पिछले 11 दिनों से जारी संघर्ष के कारण यह जलमार्ग बंद हो गया है, जिससे गैस और तेल संकट की आशंका बढ़ गई है।