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Health Tips: बढ़ते प्रदूषण में करें ये योग, फेफड़े होंगे मजबूत

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Health Tips: दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में इस समय प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया है। हवा में मौजूद धूल, धुआं और हानिकारक गैसें हमारे फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही हैं। डॉक्टर लोगों को प्रदूषण से बचने की सलाह दे रहे हैं। साथ ही, वे कहते हैं कि ब्रीदिंग एक्सरसाइज (सांस से जुड़ी कसरतें) करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है और फेफड़े स्वस्थ बने रहते हैं।

 

ब्रीदिंग एक्सरसाइज क्या होती है?
ब्रीदिंग एक्सरसाइज का मतलब है – सांस को एक खास तरीके से लेना और छोड़ना। इन एक्सरसाइज से फेफड़ों को मजबूत बनाया जा सकता है और ऑक्सीजन का प्रवाह शरीर में बेहतर होता है।

 

ब्रीदिंग एक्सरसाइज क्यों जरूरी है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, ये एक्सरसाइज सीओपीडी (Chronic Obstructive Pulmonary Disease), अस्थमा, और लंग्स फाइब्रोसिस जैसी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं। ये फेफड़ों के डायाफ्राम (सांस लेने वाली मुख्य मांसपेशी) को मजबूत करती हैं और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती हैं। इससे सांस फूलने की समस्या में भी राहत मिलती है और व्यक्ति आसानी से शारीरिक गतिविधियां कर पाता है।

नियमित अभ्यास के फायदे

डॉक्टरों के मुताबिक, जो लोग रोज़ाना ब्रीदिंग एक्सरसाइज करते हैं, उन्हें कई फायदे मिलते हैं:

  1. सांस फूलने की दिक्कत कम होती है।
    पहले जो लोग छोटी दूरी चलने पर भी थक जाते थे, वे धीरे-धीरे अधिक देर तक चल या काम कर सकते हैं।
  2. ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है।
    एक्सरसाइज करने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह सही रहता है, जिससे थकान कम महसूस होती है।
  3. दैनिक कामकाज आसान हो जाते हैं।
    व्यक्ति ज्यादा देर तक बिना थके काम कर पाता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

 

अस्पताल में भर्ती होने का खतरा कम
डॉक्टर बताते हैं कि नियमित ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने वालों को सांस संबंधी बीमारियों के कारण अस्पताल में भर्ती होने की संभावना कम रहती है। इन एक्सरसाइज से सीओपीडी, अस्थमा, लंग्स फाइब्रोसिस या फेफड़ों की सर्जरी से उबर रहे मरीजों को बहुत लाभ मिलता है। इनसे लंग्स की क्षमता बढ़ती है, ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है और शरीर हल्का व ऊर्जावान महसूस करता है।

 

कौन सी ब्रीदिंग एक्सरसाइज हैं फायदेमंद?

डॉ. के अनुसार, नीचे दी गई दो एक्सरसाइज बहुत लाभकारी हैं –

  1. बॉक्स ब्रीदिंग (Box Breathing):
    इसमें चारों चरण समान समय के होते हैं –

    • 4 सेकंड तक सांस लें
    • 4 सेकंड तक सांस रोकें
    • 4 सेकंड तक सांस छोड़ें
    • 4 सेकंड तक रुकें
      यह तकनीक तनाव घटाने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
  2. अनुलोम-विलोम (Alternate Nostril Breathing):
    इसमें एक नथुने से सांस लेकर दूसरे से छोड़ते हैं।
    यह फेफड़ों को साफ रखती है, मन को शांत करती है और शरीर में ऑक्सीजन का संतुलन बनाए रखती है।

 

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