नई दिल्लीः अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले के साथ शुरू हुई जंग आज पांचवें दिन में प्रवेश कर गई है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले जारी रखे हैं तो ईरान भी तगड़ा जवाब दे रहा है। पूरे मिडिल ईस्ट तक इस जंग की आग पहुंच चुकी है। ईरान ने अरब देशों में मौजूद अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। मिडिल ईस्ट में ईरान के हमलों के बीच फ्रांस ने संयुक्त अरब अमीरात में अपने बेस की रक्षा के लिए राफेल फाइटर जेट तैनात किए हैं। फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने इसकी घोषणा की है।
उन्होंने फ्रांस के परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत चार्ल्स डी गॉल को बाल्टिक सागर से मेडिटेरेनियन (भूमध्य सागर) की ओर रवाना करने का आदेश दिया है। यह कदम सहयोगी देशों की संपत्तियों और हितों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है, जहां ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष तेजी से फैल रहा है। मैक्रों ने फ्रेंच टीवी पर प्री-रिकॉर्डेड स्पीच में कहा कि चार्ल्स डी गॉल अपने एयर विंग (राफेल फाइटर जेट्स सहित) और एस्कॉर्ट फ्रिगेट्स के साथ जाएगा।
पिछले कुछ घंटों में मध्य पूर्व में राफेल फाइटर जेट्स, एयर-डिफेंस सिस्टम्स और एयरबोर्न रडार सिस्टम्स तैनात किए गए हैं। हम जरूरत पड़ने पर यह प्रयास जारी रखेंगे। मैक्रों ने साइप्रस पर ब्रिटिश एयर फोर्स बेस पर हमले का हवाला दिया। साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य है, जिसके साथ फ्रांस ने हाल ही में स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप साइन की है। उन्होंने कहा कि यह हमारा समर्थन मांगता है।
इसलिए मैंने साइप्रस के तट पर अतिरिक्त एयर-डिफेंस एसेट्स भेजने का फैसला किया है, साथ ही फ्रेंच फ्रिगेट लैंग्वेडॉक भी शाम तक वहां पहुंच जाएगी। फ्रांस ने यूएई में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है। फ्रेंच विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट ने बताया कि यूएई में फ्रांस की नौसेना, वायुसेना और थलसेना के सैकड़ों जवान तैनात हैं। अल-धफरा एयर बेस (अबू धाबी के पास) पर स्थित राफेल फाइटर जेट्स को अब यूएई के ऊपर एयर सिक्योरिटी ऑपरेशंस के लिए मोबिलाइज किया गया है। ये जेट्स फ्रेंच खासकर ईरानी ड्रोन्स और हमलों से बेसेज की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं।