- मानहानि केस में अभिजय चोपड़ा और आरुष चोपड़ा जालंधर अदालत में पेश हुए।
- अन्य आरोपी अब तक अदालत में पेश नहीं हुए, जबकि पहले जमानती वारंट जारी किए जा चुके हैं।
- मामले में हाईकोर्ट पहले ही याचिका और रिव्यू पिटिशन खारिज कर चुका है।
जालंधर: साल 2023 में कथित रूप से भ्रामक और गलत खबरें छापने से जुड़े चर्चित Punjab Kesari मानहानि मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। रियल एस्टेट कारोबारी चंदर अग्रवाल द्वारा दायर मानहानि केस में नामजद आरोपियों में से दो डायरेक्टर अभिजय चोपड़ा और आरुष चोपड़ा जालंधर की अदालत में पेश हुए हैं। इस मामले को काफी हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है और इस पर कानूनी और व्यापारिक जगत की नजर बनी हुई है।
यह मामला केवल मीडिया जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि जालंधर में चल रहे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और उनसे जुड़े निवेशकों के हितों के कारण भी चर्चा में है। कई लोग इस केस को प्रतिष्ठा और मीडिया की जिम्मेदारी से जुड़ा अहम मामला मान रहे हैं।
किन लोगों के खिलाफ दर्ज है मानहानि का मामला
इस केस में Punjab Kesari Group के मुख्य संपादक विजय कुमार चोपड़ा, डायरेक्टर अविनाश चोपड़ा, अमित चोपड़ा, अभिजय चोपड़ा, आरुष चोपड़ा, रिचा शर्मा, मनीषा अरोड़ा और संजय कुमार गुप्ता के नाम शामिल हैं।
अदालत ने शुरू में सभी आरोपियों को कई बार मौका दिया कि वे आकर अपना पक्ष रखें, लेकिन तय तारीखों पर कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार लगातार गैर-हाजिरी के बाद न्यायालय ने सख्ती दिखाई और सभी को सम्मन जारी किए। यह प्रक्रिया कानून के अनुसार की गई ताकि सभी लोग अदालत के सामने अपना जवाब दे सकें।
जमानत और अदालत की कार्रवाई
सम्मन जारी होने के बाद रिचा शर्मा, मनीषा अरोड़ा और संजय कुमार गुप्ता अदालत में पेश हुए और उन्होंने जमानत ले ली। हालांकि मुख्य संपादक विजय कुमार चोपड़ा, डायरेक्टर अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा की ओर से अभी तक जमानत के लिए कोई औपचारिक कदम सामने नहीं आया है।
इसके बाद सीजेएम फर्स्ट क्लास श्रीमती आंचल गोयल ने 2 मार्च 2026 को पेश होने के लिए जमानती वारंट जारी किए। तय तारीख पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट जालंधर श्रीमती एकता की अदालत में केवल अभिजय चोपड़ा और आरुष चोपड़ा ही पेश हुए। बाकी आरोपियों की ओर से अदालत में कोई जवाब या प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
कानूनी जानकारों का कहना है कि अदालत में नियमित रूप से पेश होना और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना बहुत जरूरी होता है। ऐसा न करने पर अदालत सख्त कदम उठा सकती है।
क्या है पूरा मामला
मामले की जानकारी के अनुसार साल 2023 में प्रसिद्ध रियल एस्टेट कारोबारी चंदर अग्रवाल के खिलाफ कुछ खबरें प्रकाशित की गई थीं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये खबरें गलत और भ्रामक थीं और इनके जरिए निवेशकों को डराने की कोशिश की गई। साथ ही दावा किया गया है कि इससे कारोबारी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
बताया जाता है कि जालंधर के 66 फुट रोड पर बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिन्हें खासकर मध्यम वर्ग के लोगों के बीच पसंद किया जाता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रकाशित खबरों से उनके व्यापार पर असर पड़ा।
हालांकि आरोपित पक्ष की ओर से इस मामले पर अभी तक विस्तार से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
हाईकोर्ट में पहले हो चुकी है सुनवाई
इस कानूनी विवाद से जुड़ा मामला पहले हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हाईकोर्ट ने पहले दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद दायर की गई रिव्यू पिटिशन भी दूसरी बार खारिज कर दी गई थी।
इन फैसलों के बाद अब जिला अदालत में चल रही कार्यवाही पर सभी की नजर है। अगली सुनवाई में बाकी आरोपियों की उपस्थिति और उनके जवाब से केस की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
आगे क्या होगा
यह मामला पंजाब के चर्चित कोर्ट मामलों में से एक माना जा रहा है। इसमें मीडिया की भूमिका, प्रतिष्ठा की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया जैसे मुद्दे भी जुड़े हुए हैं। अब सभी की नजर आगामी सुनवाई पर टिकी है, जहां अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।