ऊना/सुशील पंडित: उर्दू अदब के अज़ीम फ़नकार के.के. तूर के निधन पर ऊना जनपद के साहित्यकारों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। के.के. तूर का 93 वर्ष की आयु में 11 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ में निधन हो गया था। ऊना जनपद मुख्यालय पर आयोजित शोकसभा में ज़िले से संबंधित तमाम साहित्यकारों ने उनके देहावसान को उर्दू शाइरी की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
शोकसभा में उर्दू अदब के नामचीन शाइर जनाब ज़ाहिद अबरोल, कवि कुलदीप शर्मा, शाइर अशोक कालिया, सहित अन्य साहित्यकारों कुंदन लाल भरद्वाज, रामपाल शर्मा, अलका चावला, राजपाल कुटलेहडिया, डॉ देवकला शर्मा, प्रदीप कुमार, दिनेश कुमार, दीपक शर्मा, रचना रानी, डॉ राधिका शर्मा, डॉ कल्पना रानी, राजीव शर्मन, सपना रानी, डॉ रजनीकांत, सुधा पराशर, रिषभ वर्मा, डॉ योगेश चंदर सूद, डॉ बालकृष्ण सोनी, त्रिबिक्रम शर्मा, रामप्रकाश हिमाचली, रामकिशन भट्टी, डेज़ी एस शर्मा, सुदर्शन वर्मी, ओम देवी सैनी, डॉ सत्येन्द्र कुमार तथा शान्तिकुमार स्याल आदि ने दिवंगत आत्मा के प्रति भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की तथा शोकसंतप्त परिजनों के प्रति हार्दिक सम्वेदनाएँ व्यक्त की.
उर्दू के मा’रूफ़ अदीब जनाब ज़ाहिद अबरोल ने इस मौके पर कहा कि स्वर्गीय श्री के के तूर के निधन से उर्दू अदब को जो अपूर्णीय क्षति हुई है उसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक होना मुमकिन नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि तूर साहब के साहित्यिक स्तर के शाइर कई दहाकों के बाद पैदा होते हैं. शाइर अशोक कालिया ने कहा कि जनाब के के तूर साहब को उनकी अदबी तस्नीफ़ात के हवाले से हमेशा याद रखा जाएगा. उन्होंने कहा कि तूर साहब की तमाम शाइरी इंसानी कीमतों और उसूलों की शाइरी है.
कुलदीप शर्मा ने तूर साहब के साहित्यिक अवदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी कृतियाँ भावी पीढ़ियों के लिए लम्बे समय तक प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी. उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ से उर्दू साहित्य अकादेमी द्वारा सम्मानित होने वाले एकमात्र साहित्यकार श्री के के तूर मूलतः हिमाचल से सम्बन्धित थे , यह समस्त हिमाचल वासियों के लिए गौरव का विषय है. उन्होंने कहा कि तूर साहब का पाठक वर्ग भाषाई सरहदों के आरपार फैला हुआ है.