चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले निवासियों के संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक नागरिक-केंद्रित सुधारों को मंजूरी दी है। इन सुधारों का उद्देश्य दशकों से चली आ रही कानूनी अनिश्चितता को समाप्त करना और संपत्ति पंजीकरण को किफायती, सुरक्षित और कानूनी रूप से मजबूत बनाना है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप सरकार ने एक व्यापक ढांचा लागू किया है, जिससे नागरिकों को स्पष्ट स्वामित्व मिलेगा और राज्य के राजस्व हित भी सुरक्षित रहेंगे।
सरकार ने सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में मूल आवंटियों के पक्ष में किए गए आवंटन दस्तावेजों को स्टांप ड्यूटी से पूर्णतः मुक्त कर दिया है, जबकि गैर-मूल आवंटियों और ट्रांसफर मामलों के लिए समयबद्ध रियायती स्टांप ड्यूटी दरें अधिसूचित की गई हैं। इसके तहत 31 जनवरी 2026 तक 1 प्रतिशत, 28 फरवरी 2026 तक 2 प्रतिशत और 31 मार्च 2026 तक 3 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी निर्धारित की गई है। साथ ही, सोसायटियों द्वारा वसूली जाने वाली ट्रांसफर फीस पर भी कानूनी सीमा तय की गई है।
इन फैसलों से सहकारी हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले हजारों परिवारों को अपने घरों का स्पष्ट और कानूनी स्वामित्व मिलेगा। सरकार का मानना है कि ये सुधार न केवल संपत्ति लेन-देन को पारदर्शी बनाएंगे, बल्कि नागरिकों को अनावश्यक कानूनी विवादों से भी राहत दिलाएंगे, जिससे जनता का भरोसा और मजबूत होगा।