पंचकूला: 6 दिसंबर से लेकर 9 दिसंबर तक 11वें इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल 2025 की शुरुआत हुई। सेक्टर-5 में स्थित दशहरा ग्राउंड में आयोजित होने वाले इस भव्य कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों छात्र, युवा शोधकर्ता और विज्ञान प्रेमी भाग ले रहे हैं।
इस साल की थीम विज्ञान से समृद्धि- आत्मनिर्भर भारत रखी गई है। इसके अंतर्गत अलग सब थीमों पर इंटरएक्टिव सेशन आयोजित किए जा रहे हैं। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने साइंस फेस्टिवल का विधिवत तरीके से शुभारंभ किया।
इस मौके पर हरियाणा के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण बेदी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिहं ने विभिन्न स्टालों में जाकर उनका अवलोकन किया। मीडिया से बात करते हुए डॉ. जितेंद्र ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी महोत्सव करने का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है।
विज्ञान और नवाचार को प्रोत्साहित करके आगे बढ़ाने का श्रेय देश के पीएम मोदी को जाता है। उन्होंने पिछले दस सालों में भारत को विज्ञान प्रौद्योगिकी में आगे बढ़ाया है। चार दिनों तक चलने वाले इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का मकसद समाज के हर वर्ग के साथ जुड़ना है।
उन्होंने कहा कि तीन सी का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। पहली सी सेलिब्रेशन ऑफ साइंस अचीवमेंट, दूसरी सी कम्युनिकेशन उन तक पहुंचे जो विज्ञान को बढ़ाने में योगदान दे रहे हैं और तीसरी सी करियर यहां युवा वैज्ञानिकों के भविष्य को आगे बढ़ाया जा पाए।
इस मौके पर अंतरिक्ष यात्री कैप्टन शुभांशु शुक्ला भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने अनुभव विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों के साथ शेयर किए। उन्होंने बताया कि भारत में विज्ञान क्षेत्र बहुत प्रगति कर रहा है। यह भारतीयों के लिए काफी प्रेरणादायक है कि विज्ञान के क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बन रहा है।
अंतरिक्ष में भारत पर भी उन्होंने अपने विचार रखे। इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में अलग-अलग पहलुओं से जुड़े हुए स्टॉल लगाए गए हैं। अब जब चंद्रमा में भारत जाएगा तो लंबे समय तक वहां रहेंगे। अब जरुरत है कि अंतरिक्ष से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर मजबूत करना है।
उन्होंने 2047 को विकसित भारत बनाने में सभी भारतवासियों को अपना-अपना योगदान दें। गगनयान में भी भारत उन्नति कर रहा है। उन्होंने बच्चों और युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। वो सबसे ज्यादा पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा से प्रभावित हुए। उन्होंने बच्चों को खेलने, अच्छा खाने और खूब पढ़ने के लिए भी कहा। जीएमटी के द्वारा हवा में अंतरिक्ष में सोते हैं।
शुभांशु शुक्ला ने कहा कि बच्चे इस दौरान बहुत ही उत्साहित दिखे। इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल वैज्ञानिकों के लिए बहुत अच्छा मंच है आगे बढ़ने का क्योंकि विज्ञान को जितना प्रोत्साहित करेंगे उतना ही भारत इस क्षेत्र में विकसित होगा।
पीएम मोदी ने 2047 के विकसित भारत की जो सोच सोची थी उसको पूरा करने के लिए सभी देशवासियों को अपने अपने स्तर पर अपनी जिम्मेदारी को निभाना होगा। स्टेम रोबो बनाने वाले रजनीश ने बताया कि बढ़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को बढ़ावा देना है।
अब तक 5000 से ज्यादा स्कूलों में 20 लाख से ज्यादा बच्चों को इसके बारे में जागरुक किया जा रहा है। कई राज्यों के स्कूलों में भी इसकी लैब आदि बनाई जा रही है। रजनीश प्रसाद जिन्होंने अपने स्टार्ट अप द्वारा पानी को ट्रीट करके उसको दोबारा उद्योगों और कृषि के क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा रहा है।
देवेंद्र प्रकाश तिवारी ने कबाड़ से जुगाड़ करके अग्नि मिसाइल, सबमरीन, हेलीकॉप्टर बनाया है। यह बच्चों के लिए बहुत रोमांचकारी है। डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि उन्होंने साफ और शुद्ध हवा जो आज के समय में बहुत बड़ी जरुरत है। उसके लिए ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ताकि ऑक्सीजन अच्छी मात्रा में मिल पाए। विज्ञान भारती के अध्यक्ष डॉ. शेखर मांडे ने इस मौके पर कहा कि पिछले 10 सालों में पांरपरिक विज्ञान को आगे बढ़ाकर देश को विज्ञान के क्षेत्र में नई पहचान दिलवाई है। इसी कड़ी में आज पंचकूला में यह फेस्टिवल मनाया जा रहा है।
नीति आयोग में विज्ञान और प्रौद्योगिकी देख रहे वैज्ञानिक वी. के पॉल ने बताया कि भारतीय विज्ञान ने समाज पर बहुत ज्यादा असर डाला है।