अमृतसरः सुप्रीम कोर्ट 15 अक्टूबर को पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआणा की फांसी की सजा मामले में सुनवाई करने के लिए कहा था। लेकिन आज सुनवाई ना होने के कारण सिख संगत में रोष पाया जा रहा है। मामले की जानकारी देते हुए SGPC सदस्य गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि बलवंत सिंह राजोआणा के मामले में आज उम्मीदों के बावजूद भी कोई फैसला नहीं हो सका। 29 सालों से जेल में बंद राजोआणा को अब तक एक भी पैरोल नहीं मिला है और पिछले 18 सालों से उन्हें फांसी की सज़ा के मामले में टाल-माटौल किया जा रहा है। करीब 5 सालों से उन्होंने अपने मामले का जल्दी निपटारा कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है।
इससे पहले शिरोमणि गुरुद्वारा पंथक कमेटी ने राष्ट्रपति से रहम की अपील की थी। दूसरी ओर पिछले दिनों 15 तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि इस मामले में हर हाल में जवाब दिया जाए, नहीं तो कोर्ट खुद सुनवाई करेगा। आज सिख संगत और एसजीपीसी इस मामले में फैसला होने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन आज केस इन-लिस्ट नहीं किया गया। उम्मीद थी कि शायद इसे सप्लीमेंटरी लिस्ट में डाला जाएगा, लेकिन आज सुनवाई नहीं हो सकी और अब इस मामले की अगली तारीख तय हो चुकी है।
गुरचरण सिंह ग्रेवाल का कहना है कि लगातार तारीखों मिलने से सिख भावनाओं को चोट पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि राजोआणा पहले ही अपनी सज़ा का समय पूरा कर चुके हैं, फिर भी मामला लटकाया जा रहा है। संगतों में इस बात को लेकर निराशा और गुस्से की लहर है। आज फिर सिखों के बंदी सिंहो के मामले को टाला दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार और न्यायपालिका को इस मामले पर गंभीर होने की जरूरत है, क्योंकि सिख संगत के मन में बहुत गहरा रोष पाया जा रहा है।”