Centcom ने शेयर किया वीडियो
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान का युद्ध खत्म नहीं हो रहा है और लगातार बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को उड़ा दिया है। अमेरिका की सेना ने यह दावा किया है कि इन टैंकरों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। ये जहाज ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के तेल नेटवर्क थे। यह कार्रवाई अमेरिका की नौसेना ने एक जहाज पर ईरान की ओर से दो बार मिसाइल हमला करने की कोशिश के बाद की गई।
अमेरिका की सेना के अनुसार, कार्रवाई से पहले जहाजों के क्रू को बाहर निकलने के लिए भी कहा गया था। इसके बाद ही टैंकरों पर हमले किए गए। अमेरिका का यह कहना है कि इन जहाजों को काम करने के लायक ही नहीं छोड़ा गया।
Centcom ने तेल टैंकरों को बताया तेल नेटवर्क का हिस्सा
सेंटकाम ने इन सभी टैंकरों को ईरान के बड़े तेल नेटवर्क का हिस्सा बताया है। अमेरिकी सेना का यह आरोप है कि यह सभी नेटवर्क अरबों डॉलर की कमाई करते हैं। इसी पैसे से IRGC और उसके साथी संगठनों की मदद मिलती है। अमेरिका ने इसी कारण से इन जहाजों को निशाना बनाने की बात कही है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल टैकरों पर कार्रवाई की है। सेंटकॉम के अनुसार, 5 सितंबर को भी अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी कच्चे तेल के टैकरों को निशाना बनाया था। ईरानी मीडिया ने अभी अमेरिका के हमलों के बारे में बताया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों जहाजों के क्रू को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। वहीं किसी के मारे जाने की खबर नहीं है परंतु मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पांच टैकरों के तबाह होने की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है।
CENTCOM forces destroyed five Iranian crude oil carriers, Sept. 8, after the Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) targeted a U.S. Navy warship with ballistic missiles twice over the past two days. The U.S. warship successfully evaded the attempted Iranian attacks and… pic.twitter.com/Gi8a2tloN1
— U.S. Central Command (@CENTCOM) September 8, 2026
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दिख रहा है असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते हुए तनाव का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दिख रहा है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे बड़े तेल कारोबार के लिए जरुरी है। अभी के समय में यहां पर आम जहाजों की आवाजाही भी करीबन बंद हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ा लड़ाई का असर
दोनों देशों में चल रहे तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं। यदि संकट लंबा चलेगा तो इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ेगा। इसके अलावा युद्ध का असर दूसरे देशों में भी पहुंच रहा है।