नई दिल्लीः तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी घमासान के बीच अब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है। ये कार्रवाई TMC के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं के सिलसिले में की गई है। स्पीकर के कार्यालय ने सभी 20 सांसदों से नोटिस प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
गौरतलब है कि अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई चल रही है। अभिषेक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते आरोप लगाया था कि लोकसभा स्पीकर के समक्ष दायर अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से फैसला नहीं किया जा रहा है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बाद स्पीकर के कार्यालय की ओर से भी सांसदों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई।
वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय कर रहे हैं। प्रमुख हस्तियां में पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, जून मालिया और प्रसून बनर्जी जैसे हाई-प्रोफाइल नाम शामिल हैं। अभिषेक बनर्जी ने 20 बागी सांसदों के खिलाफ 18 जून को अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएं दायर की थीं। इनमें लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। TMC का तर्क है कि इन सांसदों ने पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था, लेकिन बाद में पार्टी छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के साथ जाने का फैसला किया। पार्टी के मुताबिक, यह कदम संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता का आधार बनता है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब TMC के 20 सांसदों ने पार्टी से अलग होकर खुद को एक अलग समूह के रूप में पेश किया और NCPI में विलय की घोषणा की। बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग भी की थी। उन्होंने दावा किया था कि उनके पास TMC के लोकसभा सांसदों का दो-तिहाई समर्थन है।
बागी सांसदों का कहना रहा है कि दो-तिहाई सांसदों के साथ विलय होने के कारण उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होना चाहिए। दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाला TMC धड़ा इस दावे को चुनौती देता रहा है। उनका कहना है कि केवल सांसदों का किसी दूसरी पार्टी में जाना अपने आप में वैध विलय नहीं माना जा सकता।