ऊना,सुशील पंडित: हिमाचल प्रदेश में गुणवत्ता के मानकों पर खरी न उतरने वाली दवाओं के मामलों को लेकर पूर्व जिला परिषद सदस्य पंकज सहोड़ ने चिंता व्यक्त करते हुए सरकार एवं संबंधित विभाग से इस मामले में सख्त और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
पंकज सहोड़ ने कहा कि सामने आई जानकारी के अनुसार राज्य ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने नियामकीय दायरे में आने वाले 72 मामलों में संबंधित दवा उद्योगों को शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं, जिनमें 53 नमूने महत्वपूर्ण गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। यह स्थिति गंभीर है, क्योंकि दवाएं सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी होती हैं।
उन्होंने कहा कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। जिन कंपनियों या इकाइयों की दवाएं गुणवत्ता मानकों पर विफल पाई गई हैं, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही दोषपूर्ण दवाओं की बाजार से उपलब्धता रोकने और उनकी आपूर्ति की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि दवा निर्माण इकाइयों में नियमित निरीक्षण और सैंपलिंग की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए तथा जांच प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत की शिकायत सामने आने पर उसकी भी निष्पक्ष जांच हो।
पंकज सहोड़ ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख फार्मा उत्पादन केंद्रों में से एक है और यहां बड़ी संख्या में उद्योग गुणवत्तापूर्ण दवाओं का निर्माण कर रहे हैं। कुछ इकाइयों की लापरवाही का असर पूरे उद्योग की छवि पर नहीं पड़ना चाहिए। इसलिए गुणवत्ता का पालन करने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई—दोनों साथ-साथ जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। दवा लोगों का जीवन बचाने के लिए होती है, उनके जीवन को खतरे में डालने के लिए नहीं।”