वाशिंगटनः अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता के मामलों पर सलाह देने वाली एक संस्था के अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने की मांग की है तथा अमेरिका सरकार से आरएसएस के नेताओं को राजनयिक सम्मान न देने और उनके साथ उच्चस्तरीय बैठकें न करने का आग्रह किया है।
अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) के अध्यक्ष आसिफ महमूद ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आरएसएस के सदस्य हैं। उन्होंने RSS को एक ऐसा व्यापक संगठन बताया, जिसके कुछ सहयोगी संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों में शामिल होने के आरोप लगे हैं।
महमूद की यह टिप्पणी RSS प्रमुख मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा से कुछ सप्ताह पहले आई है। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क में यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशंस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जाने वाले हैं। कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग (एएचईएडी) कर रहा है।
USCIRF के आयुक्त जीन मिल्स ने कहा कि RSS के नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, अमेरिका में उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार के जरिये सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए।
USCIRF ने मार्च में जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता के कथित उल्लंघनों को लेकर भारत की आलोचना की थी। रिपोर्ट में RSS और रिसर्च एंड ऐनालिसिस विंग (रॉ) जैसी संस्थाओं तथा कुछ व्यक्तियों के खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।
भारत ने USCIRF की रिपोर्ट को खारिज करते कहा था कि यह संगठन लगातार देश की विकृत और चुनिंदा तस्वीर पेश करता रहा है तथा इसकी रिपोर्ट संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक धारणाओं पर आधारित होती हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 16 मार्च को एक बयान में कहा था कि भारत की “चुनिंदा आलोचना” जारी रखने के बजाय USCIRF को अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और हमलों की घटनाओं, भारत को निशाना बनाने की प्रवृत्ति तथा अमेरिका में भारतीय समुदाय के सदस्यों के खिलाफ बढ़ती असहिष्णुता और डराने-धमकाने की घटनाओं पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा था कि इन मुद्दों पर गंभीर विचार की जरूरत है।

