ऊना/सुशील पंडित : हिंडन वर्ग की हालिया रिपोर्ट ने भाजपा सरकार की अडानी के पक्ष में क्रोनी कैपिटलिज्म की नीति की पोल खोल दी है। गहरे आर्थिक संकट के समय में पीएम देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को अदानी समूह को बेच रहे हैं, देश की विदेश नीति को झुका रहे हैं । एसबीआई और एलआईसी जैसे सार्वजनिक संस्थानों को निवेश करने के लिए मजबूर कर रहे हैं हाल के खुलासे ने ही गरीब और मध्यम वर्ग के भारतीयों की करोड़ों की बचत को खतरे में डाल दिया है। यह शब्द आज एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता कांग्रेस कमेटी डॉ विजय डोगरा ने कहे।
उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई उच्चतम बेरोजगारी और कुशासन की विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए सरकार द्वारा प्रायोजित विभाजनकारी एजेंडे का दंश झेल रहे देशवासियों के साथ कांग्रेस पार्टी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। लेकिन एक जिम्मेदार विपक्षी दल होने के नाते हम भाजपाई सत्ता के मित्र पूंजी पतियों को सरकारी खजाने की लूट की खुली छूट और प्रधानमंत्री से संबंधित इस पूरे अदानी महाघोटाले में हो रहे घोटालों से भी चिंतित हैं इसलिए हम सरकार को उसकी जिम्मेदारी से भागने की इजाजत नहीं दे सकते और आज “हम अडानी के हैं कौन” श्रृंखला में देश के कई प्रमुख शहरों में प्रेस वार्ताएं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने राहुल गांधी के सवालों और कांग्रेस अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे के भाषण के अंशों को बेशक संसदीय कार्यवाही से हटा दिया हो। लेकिन भारत के लोग सब देख रहे हैं कि संसद में क्या हो रहा है। लोग जानना चाहते हैं कि सरकार संसदीय भाषणों का स्तर गिराने की कोशिश क्यों कर रही है और प्रधानमंत्री संसद में प्रासंगिक सवालों के जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं।उन्होंने कहा कि हम किसी व्यक्ति के दुनिया के अमीरों की सूची में 609वें से दूसरे स्थान पर पहुंचने के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन हम निसंदेह सरकार द्वारा प्रायोजित निजी एकाधिकारों के खिलाफ हैं। क्योंकि वे जनता के हितों के विरुद्ध होते हैं विशेष तौर पर हम टैक्स हेवन देशों से आपत्तिजनक संबंधों धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे एक खास व्यक्ति द्वारा हमारी अंतरराष्ट्रीय सद्भावना और राष्ट्रीय संसाधनों का लाभ उठाते हुए एक आधिपत्य स्थापित करने के खिलाफ हैं।
डॉक्टर डोगरा ने कहा हम जानना चाहते हैं कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति बनाने से क्यों डर रही है जबकि संसद के दोनों सदनों में उसका अच्छा बहुमत है।उन्होंने कहा कि वर्षों से प्रधानमंत्री मोदी ने ईडी, सीबीआई और डीआरआई (खुफिया राजस्व निदेशालय) जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग अपने राजनीतिक या सिद्धांतिका प्रतिद्वंद्वियों को डराने धमकाने के लिए किया है। साथ ही उन व्यापारिक घरानों को दंडित करने के लिए भी किया है जो उनके पूंजीपति मित्रों के वित्तीय हितों के अनुरूप नहीं है।उन्होंने कहा कि एकाधिकार स्थापित करने के लिए बंदरगाह, हवाई अड्डे, रक्षा क्षेत्र, विद्युत क्षेत्र, जैसे बड़े आधारों को भी बेचने का काम किया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले 9 वर्षों में सीएजी, सीबीआई जैसे सभी सरकारी एजेंसियों और संस्थाओं पर चाहे नियंत्रण कर लिया हो लेकिन सत्य हमेशा सामने आ ही जाता है उसे ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल कर दबाया नहीं जा सकता।