नई दिल्ली: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से पूरी दुनिया हिल गई है परंतु अब इस सर्जिकल स्ट्राइक के पीछे की जो कहानी सामने आ रही है वो भी काफी चौंकाने वाली है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा ईरान पर हमले का फैसला रातों-रात नहीं लिया गया वहीं पिछले सऊदी अरब और इजरायल की हफ्तों की गुप्त कूटनीति पर भी भारी दबाव था।
ट्रंप को फोन कर रहे थे सऊदी अरब के प्रिंस
रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले एक महीने में डोनाल्ड ट्रंप को कई निजी फॉन कॉल भी किए हालांकि सऊदी अरब सार्वजनिक तौर पर कूटनीति और शांति की बात कर रहा था परंतु पर्दे के पीछे प्रिंस MBS लगातार ट्रंप पर सैन्य कार्रवाई के लिए दबाव बना रहे थे। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लंबे समय से अमेरिका को ईरान के खिलाफ सीधी कार्रवाई के लिए उकसा रहा था। इन दो प्रमुख सहयोगियों की लामबंदी ने ट्रंप को इस ऐतिहासिक एयर स्ट्राइक के लिए राजी कर लिया।
खामेनेई का हुआ अंत
रविवार को सुबह ट्रंप और इजरायल के बाद ईरानी सरकारी मीडिया ने यह पुष्टि की है कि भीषण हमले में 86 साल के खामेनेई की मौत हो गई है। ट्रंप ने इसको ईरान के लोगों के लिए अफने देश पर वापिस पाने का सबसे बड़ा़ अवसर बताया है। इन तनाव के बीच में सऊदी प्रिंस और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के बीच में भी बात हुई है जिसमें उन्होंने ईरान के हमलों को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए एकजुटता जाहिर की है। यह प्रतिक्रिया दशकों पुरानी सऊदी ईरान प्रतिद्वदिंता को दर्शाती है इसको विश्लेषक मौके पर नया शीत युद्ध कहते हैं।
एक ओर सऊदी अरब खुद को सुन्नी जगत का संरक्षक मानता है वहीं ईरान शिया शक्ति का केंद्र है। इस सांप्रदायिक और राजनीतिक विभाजन ने आज मिडिल ईस्ट को इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां पर ईरान का सर्वोच्च नेता खत्म हो गया है। उसके पड़ोसी ही उसकी आलोचना कर रहे हैं।