नई दिल्लीः ईरान, इजरायल और अमेरिका के युद्ध का असर भारत में देखने को मिल रहा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण भारत में सरकारी तेल कंपनियों जैसे IOCL और BPCL ने 1 अप्रैल को इंडस्ट्रियल डीजल (HSD) के दाम बढ़ा दिए हैं। इसकी कीमत में 28.22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह 109.59 रुपये से बढ़कर 137.81 रुपये प्रति लीटर हो गया है। ऐसे में कीमतों में सीधे-सीधे 25 परसेंट का उछाल आया है। इससे पहले 20 मार्च को भी इंडस्ट्रियल डीजल के दाम 22 रुपये बढ़ाए गए थे।
साथ ही फर्नेस ऑयल (FO) की कीमत में भी करीब 23.77 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। आम पेट्रोल और डीजल इस्तेमाल करने वालों के लिए पंप की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। यानी कि रिटेल पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले पेट्रोल-डीजल की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इंडस्ट्रियल डीजल का इस्तेमाल बड़ी फैक्ट्रियों, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, कंस्ट्रक्शन कंपनियों और बड़े ट्रांसपोर्टर करते हैं, इसलिए इस बढ़ोतरी का असर इन सेक्टरों पर पड़ेगा। हालांकि आम लोगों के लिए पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
लेकिन निजी कंपनियों जैसे Nayara Energy और Shell ने अपने नुकसान की भरपाई के लिए दाम 3 से 25 रुपये तक बढ़ा दिए हैं। बता दें कि यह एक तरह का फ्यूल ऑयल है, जो डीजल के मुकाबले थोड़ा गाढ़ा होता है। इसका इस्तेमाल भारी-भरकम मशीनों को चलाने में किया जाता है। चूंकि यह डीजल के मुकाबले सस्ता होता है इसलिए इसका इस्तेमाल उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है। इसकी भी कीमत में हुई 23.77 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से स्टील और सीमेंट इंडस्ट्रीज की लागत बढ़ने वाली है। इसका इस्तेमाल फैक्ट्रियों में भट्टियों को जलाने में, पावर प्लांट्स में बिजली उत्पादन के लिए, फैक्ट्रियों के बॉयलर्स में भाप बनाने के लिए और बड़े जहाजों के इंजन में होता है।