सीसीटीवी टेंडर दिलवाने के बहाने किया फ्रॉड
पंचकूला: हरियाणा पुलिस की एंटी इमिग्रेशन फ्रॉड यूनिट ने फर्जी डीएसपी बनकर और टेंडर दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में मुख्य आरोपी विपुल गोयल और उसके भाई तरुण गोयल को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से फ्रॉड की कुछ राशि और हरियाणा पुलिस के डीएसपी की फर्जी वर्दी बरामद की है।
एसीपी विक्रम नेहरा ने बताया कि हमें पानीपत निवासी योगेश नामक व्यक्ति से एक शिकायत मिली थी। जिसके अनुसार वर्ष 2014 में तरुण गोयल ने अपने भाई विपुल गोयल की मुलाकात योगेश से करवाई और दावा किया कि विपुल ने डीएसपी का पद हासिल कर लिया है। विश्वास जीतने के लिए आरोपी विपुल अक्सर पुलिस की वर्दी पहनकर योगेश से मिलता था। आरोपियों ने योगेश को सीसीटीवी कैमरे लगाने का सरकारी टेंडर दिलाने का लालच दिया। विश्वास में आकर पीड़ित ने फरवरी 2017 में पंचकूला सेक्टर-6 में आरोपियों को 15 लाख रुपये नकद सौंपे। इसके बाद विभिन्न बैंक खातों और नकद माध्यमों से किश्तों में कुल 35 लाख रुपये ऐंठ लिए गए।
पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2017 से 2022 तक टेंडर न मिलने पर जब उसने अपने पैसे वापस मांगे, तो दोनों भाई उसे टालते रहे। जून 2023 में दबाव बनाने पर आरोपियों ने केवल 1.96 लाख रुपये वापस किए और उसके बाद संपर्क तोड़ दिया। जांच करने पर पीड़ित को पता चला कि विपुल गोयल पुलिस में कोई अधिकारी नहीं है। शिकायत के आधार पर 11 सितंबर 2025 को सैक्टर-7 थाना में भारतीय दंड संहिता की धारा 171, 406, 419 और 420 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
एंटी इमिग्रेशन फ्रॉड यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर योगविन्द्र सिंह के नेतृत्व में जांच अधिकारी एएसआई गुरबचन ने टीम की मदद से कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को 28 मार्च गिरफ्तार किया। 29 मार्च को कोर्ट से 3 दिन का रिमांड हासिल किया गया। रिमांड के दौरान आरोपी तरुण और विपुल से धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल की गई हरियाणा पुलिस की डीएसपी की फर्जी वर्दी बरामद की गई। आज रिमांड समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत भेज दिया गया है। पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है।