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सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा ‘तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0’

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“तंबाकू छोड़ो, ज़िंदगी चुनो” के संदेश के साथ ऊना में जागरूकता की नई लहर

ऊना/सुशील पंडित: ऊना जिला इन दिनों एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की राह पर है। “तंबाकू छोड़ो, ज़िंदगी चुनो” के सशक्त संदेश के साथ शुरू हुआ ‘तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0’ जिले में एक जन-जागरूकता मुहिम से आगे बढ़कर सामाजिक आंदोलन का रूप ले रहा है। इस अभियान की शुरुआत उपायुक्त जतिन लाल ने 9 अक्तूबर को क्षेत्रीय अस्पताल ऊना से की थी, जो आगामी 8 दिसंबर तक चलेगा।

यह पहल स्वास्थ्य विभाग के सौजन्य से पूर्व में आयोजित सफल अभियानों का तीसरा चरण है, जिसमें इस बार नई रणनीति, व्यापक जनभागीदारी और विभागीय समन्वय पर विशेष बल दिया गया है। अभियान का उद्देश्य तंबाकू सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति लोगों में जागरूकता लाना, युवाओं को नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित करना और ऊना को पूर्णतः “तंबाकू मुक्त जिला” बनाना है।  यह मुहिम “तंबाकू मुक्त हिमाचल” के राज्यव्यापी लक्ष्य को साकार करने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है।

जनभागीदारी से गति पकड़ता अभियान

यह अभियान प्रशासन की किसी औपचारिक पहल से अधिक, अब एक सामाजिक आंदोलन के रूप में विकसित हो चुका है। उपायुक्त जतिन लाल का कहना है कि इस प्रयास की सफलता प्रत्येक नागरिक की भागीदारी पर निर्भर है। हमारा उद्देश्य केवल तंबाकू नियंत्रण तक सीमित नहीं, बल्कि ऊना को एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त जिला बनाना है।

जतिन लाल बताते हैं कि अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए पंचायती राज संस्थानों, गैर-सरकारी संगठनों, स्वयंसेवी समूहों और युवाओं को इसमें जोड़ा गया है। ग्रामीण स्तर पर नुक्कड़ नाटक, रैलियां, निबंध व चित्रकला प्रतियोगिताएं और सामुदायिक बैठकों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जा रही है। वहीं, डिजिटल मंचों और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर भी यह संदेश तेजी से प्रसारित किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इस मुहिम से जुड़ सकें।

उपायुक्त ने लोगों से आह्वान किया है कि वे इस पहल को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और तंबाकू मुक्त हिमाचल के संकल्प में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल स्वास्थ्य सुरक्षा का संदेश नहीं दे रहा, बल्कि समाज को स्वच्छ, सशक्त और सजग बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

युवाओं को केंद्र में रखकर रची गई है रणनीति

अभियान का सबसे बड़ा फोकस युवाओं पर है, क्योंकि तंबाकू सेवन की शुरुआत प्रायः किशोरावस्था में होती है। उपायुक्त जतिन लाल ने बताया कि शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त क्षेत्र घोषित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी स्कूलों और कॉलेजों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री न हो।

पंचायती स्तर पर ‘तंबाकू मुक्त गांव’ अभियान को भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस विभाग की सहायता से सीओटीपीए-2003 और पीईसीए-2019 के तहत तंबाकू नियंत्रण कानूनों का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी बार या रेस्तरां में नियमों का उल्लंघन करते हुए हुक्का परोसने जैसी गतिविधि पाई जाने पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, हिमाचल प्रदेश तंबाकू उत्पाद नियंत्रण अधिनियम, 2016 और खुली सिगरेट एवं बीड़ी बिक्री निषेध अधिनियम, 2016 को भी पूरी सख्ती से लागू करने पर बल दिया गया है।

हर विभाग निभा रहा है अपनी जिम्मेदारी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.के. वर्मा बताते हैं कि इस जन-अभियान में सभी विभागों की समन्वित भूमिका है। हर विभाग इसकी सफलता में अपने अपने स्तर पर प्रयासरत है। युवाओं और विद्यार्थियों को तंबाकू और अन्य नशे के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए निरंतर गतिविधियां चलाई जा रही हैं, ताकि नई पीढ़ी स्वस्थ, रचनात्मक और नशामुक्त जीवन की ओर अग्रसर हो सके। तंबाकू मुक्त युवा अभियान 3.0 आज ऊना में केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बन रहा है।

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