सेहत: जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे शरीर भी कमजोर होता जाता है। शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर एनर्जी, हड्डियों की मजबूती, याददाश्त और इम्यून सिस्टम पर साफ दिखता है। खासतौर पर 50 के बाद शरीर पोषक तत्वो को अच्छे से अब्जॉर्ब नहीं कर पाता ऐसे में सही खान-पान और विटामिन्स पर ध्यान देना बहुत जरुरी है। विटामिन्स भले ही मात्रा में छोटे होते हैं परंतु शरीर को सही तरीके से चलाने में इनकी भूमिका बहुत बड़ी होती है। सही विटामिन्स मिलने से न सिर्फ बीमारियों का खत्म कम होता है। बल्कि उम्र बढ़ने के बाद शरीर एक्टिव और फिट बना रहता है।
विटामिन-डी
रिपोर्ट्स के अनुसार, विटामिन-डी को सनशाइन भी कहते हैं। यह शरीर में उस समय बनता है जब त्वचा धूप के संपर्क में आती है परंतु उम्र बढ़ने के साथ शरीर की यह क्षमता कम हो जाती है। यही कारण है कि बुजुर्गों में इसी कमी ज्यादा देखने को मिलती है। विटामिन-डी का मुख्य काम कैल्शियम को अब्जॉर्ब करना होता है। यह हड्डियों को मजबूत रखने के लिए जरुरी होता है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ा जाता है। रिसर्च के अनुसार पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी लेने से ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है।
कैल्शियम और विटामिन-B12
कैल्शियम भी शरीर के लिए उतना ही जरुरी है खासतौर पर 50 साल के बाद। उम्र के साथ हड्डियों में घनत्व कम होने लग जाता है और महिलाओं में मेनोपॉज के बाद यह प्रक्रिया तेज हो जाती है। दूध, दही, पनीर और हरी सब्जियां कैल्शिम के सोर्स है। इसके अलावा विटामिन का भी खास महत्व है। यह दिमाग के सही काम करने और रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करता है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में B12 का अवशोषण कम हो जाता है जिससे थकान, कमजोरी और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
विटामिन-सी और ई
विटामिन-सी इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाता है। यह शरीर की मरम्मत में मदद करता है। त्वचा को स्वस्थ रखता है। स्ट्रॉबेरी, कीवी, संतरा और ब्रोकोली जैसे खाद्य पदार्थ इसके अच्छे स्त्रोत हैं। विटामिन-ए एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स हैं जो सेल्स को नुकसान से बचाता है। विटामिन-के खून के थक्के बनने और हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है। पालक, केल और ब्रोकोली जैसी हरी सब्जियों में यह काफी अच्छी मात्रा में मौजूद होता है।