चंडीगढ़ः भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पहलगाम आतंकी हमले का बदला लिया। भारतीय सेना ने एयर स्ट्राइक कर पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में तबाही मचाई। 9 आतंकी ठिकाने ध्वस्त किए। 100 से ज्यादा आतंकी मारे। भारत के हमले के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने इंडिया पर अटैक किया। कई मिसाइलें और ड्रोन दागे लेकिन भारतीय सेना के एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी हमलों को नाकाम किया। भारतीय सेना ने होशियारपुर में गिराई गई चीनी मिसाइल को हवा में तबाह कर दिया था। अब अमेरिका-जापान समेत 7 देशों ने भारत से चीनी मिसाइल का मलबा मांगा है।
दरअसल, यह मिसाइल चीन में बनी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फाइव आइज़ देशों (अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड) के अलावा, फ्रांस और जापान इस मिसाइल के मलबे की जांच करना चाहते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि चीन ने इसे बनाने के लिए किस तकनीक का उपयोग किया है। 9 मई को, होशियारपुर जिले के एक खेत से PL-15E मिसाइल के टुकड़े बरामद किए गए थे। इसके बाद 12 मई को वायु सेना ने पहली बार एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका मलबा दिखाया।
भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान ने JF-17 लड़ाकू विमान से चीनी बनी PL-15E मिसाइल दागी थी, लेकिन इसे हवा में ही नष्ट कर दिया गया और यह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। रिपोर्टों के अनुसार, यह पहली बार है जब PL-15E मिसाइल का इस्तेमाल किसी टकराव में किया गया है। PL-15E मिसाइल की उन्नत तकनीक और लंबी रेंज के कारण, ग्लोबल टाइम्स जैसे चीनी सरकारी मीडिया और चीनी रक्षा विश्लेषक इसे पश्चिमी देशों और भारत के लड़ाकू विमानों के लिए एक चुनौती बता रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारत को मिले टुकड़े सही हैं, तो उनसे बहुत महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं।
जैसे: मिसाइल का राडार कैसे काम करता है (राडार सिग्नेचर के माध्यम से), उसकी मोटर कैसे बनी है (मोटर संरचना के माध्यम से), मिसाइल को निर्देशित करने वाली तकनीक (मार्गदर्शन प्रणाली के माध्यम से), और AESA राडार (अर्थात एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैनड एरे) के बारे में भी कई महत्वपूर्ण बातें जानी जा सकती हैं।
