चंडीगढ़ः पंजाब में नशे के खिलाफ सरकार द्वारा सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इसके बावजूद पंजाब में नशा सरकार के लिए का सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। औसतन हर दूसरे दिन एक मौत नशे की लत के कारण होती है। नशा मुक्ति केंद्रों में 9 लाख लोग पंजीकृत हैं और 25 लाख से अधिक लोग नशा कर रहे हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें स्कूल जाने वाले बच्चे और विवाह योग्य उम्र के युवा सबसे ज्यादा हैं। सीमा के रास्ते आने वाली दवाओं की गांवों और शहरों में होम डिलीवरी की जा रही है।
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक 2017-2021 के दौरान पंजाब में 272 मौतें नशे से हुईं। 2017 में 71, 2018 में 78, 2019 में 45 व 2021 में 78 की जान गई। 2020 में मौतें जीरो बताई हैं। 2017 से 2019 तक मरने वालों में 18 से 30 आयु के 122 युवा, 59 की आयु 30-45 साल थी। 45 से 60 के बीच 8 व 60 से ऊपर आयु के 2 की मौत हुई। मृतकों में 14 से 18 साल के 3 युवा शामिल थे। NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में 2017 से 2021 तक यानी 4 साल में नशे की वजह से 272 मौतें हुई हैं। 2020 में कोरोना से शून्य मौतें दिखाई गईं। फिर 2022 से अब तक 19 महीनों में मौतों की संख्या 272 हो गई है।
ये 19 महीने के आंकड़े केवल अखबारों की रिपोर्टों पर आधारित हैं, जिनमें केवल वे मौतें शामिल हैं जो अस्पतालों में हुईं या सार्वजनिक की गईं। नशे का सबसे ज्यादा प्रभाव मालवा में रहा है। जहां पर पिछले 19 माह में 222 लोगों की नशे से मौत हुई है। अकेले फिरोजपुर में 56 लोगों ने नशे से जान गंवा दी। दूसरे स्थान पर मोगा जिला है। जहां 47 मौतें हुई हैं। बठिंडा में 32 लोग 2 साल में नशे से जान गंवा चुके हैं। 23 जिलों में से पठानकोट और फतेहगढ़ साहिब में अब तक कोई मौत सामने नहीं आई है।