नैनीतालः उत्तराखंड में हुए पंचायत चुनाव के बाद अब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है। कई जिलों में इसे लेकर उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर है और वो किसी भी तरह से ये पद अपने नाम करना चाहते हैं। इसी बीच नैनीताल से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी नेताओं ने पुलिस के साथ मिलकर चार पंचायत सदस्यों का अपहरण कर लिया। दरअसल, इस मामले को लेकर कांग्रेस ने हाईकोर्ट का रूख किया है।
आज हाई कोर्ट ने नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस समर्थित के पांच जिला पंचायत सदस्यों को सुबह मतदान को जाते समय माल रोड से अगवा करने के मामले पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ कांग्रेस व सरकार दोनों पक्षों को सुना। मामले की स्थिति जानने के लिए कोर्ट ने एसएसपी , जिलाधिकारी व एएसपी से कोर्ट में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने का कहा। करीब दस मिनट के बाद दोनों अधिकारी वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। कोर्ट ने उनसे कहा कि मतदान शांति पूर्वक कराएं।
कोर्ट के निर्देशों के बाद भारी पुलिस बल दस सदस्यों को लेकर जिला पंचायत कार्यालय पहुंचा। जहां मीना देवी बडौन, पूनम दीनी तल्ली, निधि जोशी दाड़िमा, पुष्पा नेगी सूपी, संजय बोहरा सिमलखा, अनीता आर्या गुलजारपुर बंकी, अर्नव कंबोज गेबुवा, जिशांत कुमार मेहरागांव, देवकी बिष्ट ज्योलीकोट, हेम चंद्र तलिया ने मतदान किया। मतदान के बाद पुलिस फोर्स सदस्यों को वापस ले गया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और अन्य कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर पुलिस की मदद से कांग्रेस के पांच जिला पंचायत सदस्यों को अगवा करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि डिकर सिंह मेवाड़ी- ककोड़, प्रमोद सिंह- ओखलकांडा, तरुण कुमार शर्मा- चापड़, दीप सिंह बिष्ट- चौखुटा और विपिन सिंह- जंगलियागांव को अगवा किया गया है।