मुबंईः राजनीति में कुर्सी के लिए कुछ भी हो सकता है। ऐसा ही एक मामला महाराष्ट्र में देखने को मिला है। जहां सियासत के 2 गुट भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे के साथ हाथ मिला लिया। दरअसल, महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनाव में नगर परिषद की सत्ता के लिए भाजपा और कांग्रेस साथ आ गए। ऐसा महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में हुआ है। हैरानी की बात यह है कि देशभर में कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा ने अंबरनाथ में सीधे कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर सत्ता का रास्ता चुना है।
भाजपा और कांग्रेस के इस अप्रत्याशित गठबंधन के पीछे एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना (शिंदे) को सत्ता से दूर रखने की मंशा को वजह बताया जा रहा है। वहीं भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन 24 घंटे भी नहीं चल पाया है। दरअसल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नगर निकाय चुनावों के बाद बने कुछ स्थानीय गठबंधनों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बीजेपी की स्थानीय इकाइयों को साफ निर्देश दिया है कि वे कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ किए गए गठबंधनों को तुरंत खत्म करें।
दूसरी ओर चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस ने बड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाया है। पार्टी ने अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अंबरनाथ नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार होने के बावजूद बीजेपी के साथ कथित गठबंधन करने के आरोपों के बाद की गई है। कांग्रेस नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी लाइन से हटकर कोई भी फैसला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इस कदम को चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदीप पाटिल ने पार्टी नेतृत्व को बिना बताए ऐसे कदम उठाए जो कांग्रेस की विचारधारा और संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ हैं। पत्र में बताया गया कि अंबरनाथ नगर पालिका चुनाव कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर लड़े गए थे और पार्टी के 12 उम्मीदवार जीतकर आए। इसके बावजूद बीजेपी पार्षदों के साथ गठबंधन की खबरें सामने आईं। सबसे गंभीर बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी कार्यालय को मीडिया के माध्यम से मिली। कांग्रेस ने इसे संगठनात्मक मर्यादा का सीधा उल्लंघन माना है।
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गणेश पाटिल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदीप पाटिल का आचरण पार्टी विरोधी है और इससे कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचा है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम कांग्रेस के सिद्धांतों और अनुशासन के खिलाफ है। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। सिर्फ प्रदीप पाटिल को ही नहीं बल्कि अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की पूरी कार्यकारिणी को भी भंग कर दिया गया है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि अनुशासन तोड़ने वालों के लिए कोई नरमी नहीं होगी।
