शिमला: लैंगिक संवेदनशील बजट को बढ़ावा देने के लिए राज्य परिवर्तन प्रकोष्ठ ने योजना विभाग के सहयोग से, जीआईजेड इंडिया और नीति आयोग के साथ मिलकर, शिमला में गुरुवार को ‘नीति से परिणिति विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस पहल का उद्देश्य नोडल अधिकारियों की क्षमता मजबूत करना था, ताकि लैंगिक संबंधी नीतिगत प्रतिबद्धताओं को मापने योग्य बजटीय कार्यवाहियों में बदला जा सके। इससे हिमाचल प्रदेश में समावेशी विकास और सामाजिक समानता सुनिश्चित होगी।
कार्यक्रम में योजना विभाग के सलाहकार डॉ. बासु सूद ने कहा कि लैंगिक संवेदनशील योजना और बजट संसाधनों के कुशल उपयोग का महत्वपूर्ण साधन है। सफलता के लिए सिर्फ प्रशासनिक पालन नहीं, बल्कि सोच में बुनियादी बदलाव जरूरी है।
योजना विभाग और जीआईजेड इंडिया के विशेषज्ञों ने लैंगिक विश्लेषण, डेटा-आधारित निर्णय लेना और निगरानी ढांचे पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इससे विभाग अपनी मौजूदा योजनाओं में लैंगिक दृष्टिकोण जोड़ सकेंगे।
बैठक में विभिन्न विभागों के प्रमुखों और नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला में कार्यान्वयन की व्यावहारिक चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रत्येक विभाग को लैंगिक परिणामों की रिपोर्टिंग सुधारने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा गया। यह सहयोगी प्रयास विभागों के बीच समन्वय बढ़ाएगा और राज्य में जवाबदेह, परिणाम-उन्मुख सार्वजनिक व्यय को मजबूत करेगा।