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तकनीक से बदल रही खेती की तस्वीर, ऊना के 39 हजार से अधिक किसान डिजिटल रजिस्ट्री से जुड़े

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एग्रीस्टैक पोर्टल से बन रहा किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड

ऊना/सुशील पंडित: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी व सरल तरीके से पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहलें की जा रही हैं। इसी क्रम में एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किसानों की डिजिटल रजिस्ट्री तैयार करने का कार्य जिला ऊना में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पहल के तहत किसानों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे उनकी भूमि, फसल और सरकारी योजनाओ से जुड़ी जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सके और योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।

जिले में तेजी से बढ़ रहा पंजीकरण
ऊना जिले के कृषि विभाग के उपनिदेशक प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से जिले में अब तक 39,373 किसानों को किसान रजिस्ट्री के तहत जोड़ा जा चुका है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए ऑनलाइन फार्मर रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य किया गया है। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूनीक फार्मर आईडी) प्रदान की जाएगी, जिससे किसान का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा और भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करना और भी आसान हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि डिजिटल किसान रजिस्ट्री बनने से किसानों से जुड़ी जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होगी और विभिन्न योजनाओं के लाभ वितरण की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी बनेगी।

योजनाओं के लाभ में आएगी अधिक पारदर्शिता
प्रेम सिंह ठाकुर ने बताया कि यह पंजीकरण प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित अन्य कृषि योजनाओं के लाभार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। एग्रीस्टैक पोर्टल के माध्यम से किसानों से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं का लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुगम बन सकेगी।
उन्होंने बताया कि इससे किसानों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी, क्योंकि उनका पूरा विवरण डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा।

डिजिटल क्रॉप सर्वे से मिल रही सटीक जानकारी

उन्होंने बताया कि जिले में डिजिटल क्रॉप्स सर्वेक्षण प्रक्रिया भी जारी है। इसके तहत अब तक 71,444 सर्वेक्षण किए जा चुके हैं, जिनमें से 27,498 सर्वे स्वीकृत हो चुके हैं। इस सर्वेक्षण में मोबाइल ऐप और जीपीएस तकनीक के माध्यम से फसलों की मैपिंग की जा रही है, ताकि किसानों की भूमि के रिकॉर्ड को फसल संबंधी जानकारी से जोड़ा जा सके।
इस प्रक्रिया से कृषि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र किसानों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाना संभव होगा।

लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से भी करवा सकते हैं पंजीकरण

उपनिदेशक ने बताया कि जिन किसानों का अभी तक इस पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हुआ है, वे जल्द से जल्द अपना ऑनलाइन फार्मर रजिस्ट्रेशन करवा लें। किसान अपने नजदीकी लोक मित्र केंद्र या संबंधित पोर्टल https://hpfr.agristack.gov.in/farmer-registry-hp/# के माध्यम से यह प्रक्रिया नि:शुल्क पूरी कर सकते हैं। पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, भूमि का कोई भी खसरा नंबर तथा आधार से लिंक्ड मोबाइल नंबर आवश्यक रहेगा।

किसानों को जागरूक करने के लिए चल रहा अभियान

कृषि विभाग द्वारा किसानों को इस पहल के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक किसान एग्रीस्टैक पोर्टल से जुड़ सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकें।

उपायुक्त बोले…अधिक पारदर्शी और सरल तरीके से मिलेगा योजनाओं का लाभ 

उपायुक्त जतिन लाल ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे एग्रीस्टैक पोर्टल पर अपना पंजीकरण अवश्य करवाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल किसान रजिस्ट्री बनने से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी और सरल तरीके से मिल सकेगा। उन्होंने संबंधित विभागों को  किसानों को इस पहल के प्रति व्यापक रूप से जागरूक करने के निर्देश दिए हैं ताकि कोई भी पात्र किसान इस सुविधा से वंचित न रहे।

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