तनावपूर्ण जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए राम नाम का जप सबसे शक्तिशाली साधना
बद्दी/सचिन बैंसल: नगर निगम बद्दी के बसंती बाग में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिवस पर भक्ति और भावनाओं का ऐसा संगम उमड़ा कि पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। अयोध्या धाम के सुप्रसिद्ध कथा व्यास डॉ. धरणीधर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को त्याग, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि “प्रभु हमारे आचरण और उत्तम विचारों में निवास करें, यही सबसे बड़ी भक्ति है।” महाराज ने अपने प्रवचन में श्रीराम के आदर्श चरित्र का विस्तारपूर्वक वर्णन करते हुए उन्हें एक आदर्श राजा, उत्कृष्ट भाई, श्रेष्ठ पुत्र और महान मित्र बताया।
उन्होंने कहा कि राम नाम केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन को स्थिरता, संतुलन, आत्मबल और शांति प्रदान करने वाला दिव्य मंत्र है। उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण जीवन में धैर्य, सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए राम नाम का जप सबसे शक्तिशाली साधना है, जो मन को विकारों से मुक्त कर व्यक्ति को सही दिशा प्रदान करता है। कथा के दौरान सीता हरण, राम–हनुमान मिलन, रावण वध और राम–सीता के राज्याभिषेक सहित पूरी श्रीराम लीला का दिव्य एवं भावनात्मक अनुकरण किया गया। मंचन इतना प्रभावी रहा कि श्रद्धालु भावविभोर होकर भावनाओं में डूब गए। समापन पर राम–सीता राज्याभिषेक का दृश्य देखते ही पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
डॉ. धरणीधर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को जीवन में भक्ति, मर्यादा, सत्य, सेवा और आत्मसंयम अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि जो व्यक्ति राम नाम में मन लगाता है, उसका जीवन स्वयं ही सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ जाता है। कार्यक्रम में हंसराज आनंद झा, सागर शर्मा , कमल सिंह,संजय चौरसिया, सुनील राय, सोनू बंसल, मुरलीधर, कन्हैयालाल, रंजीत पांडेय, डॉ. श्रीकांत शर्मा, रंजीत श्रीवास्तव, संजय तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।