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गुलाम शाह को बाप मानने वाले पुजारियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं: *यति सत्यदेवानंद सरस्वती महाराज

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मन्दिर के पुजारियों को मोo गौरी का इतिहास नही भूलना चाहिए: बाल बाबा योगी ज्ञान नाथ
ऊना/ सुशील पंडित: मास्टर सलीम के विरुद्ध संत समाज का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। संत समाज अब सलीम के जागरणों का हिमाचल प्रदेश में आयोजन नहीं होने देगा। मास्टर सलीम ने माता चिंतपूर्णी के ऊपर एक अभद्र टिप्पणी की थी। कुछ पुजारियों का उल्लेख किया था जिन्होंने स्वयं माता चिंतपूर्णी का नाम किसी गुलाम शाह के साथ जोड़ा था।
जब विरोध हुआ तो मंदिर जाकर माफी मांग ली और पुजारियों ने ही इस माफी के ड्रामे को पूरा किया। वीरवार को बाल योगी बाबा ज्ञाननाथ जी महाराज थानाकलां वाले, डासना के संत यति सत्यदेवानंद सरस्वती महाराज ने मोहम्मद सलीम खान द्वारा मां चिंतपूर्णी पर अभद्र टिप्पणी के विषय पर ऊना में एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। 
बालयोगी ने कहा कि “मन्दिर के पुजारियों ने विषय की गहराई में गए बिना ही सलीम को मंदिर में दाखिल करवाया और बाद में पुजारियों द्वारा उससे माफी मंगवा ली गई। इस तरह की माफी निंदनीय है। मां चिंतपूर्णी के पुजारियों को मोहम्मद गौरी का इतिहास याद करने की आवश्यकता है। कैसे उसने पकड़े जाने के बाद 17 बार माफी मांगी थी और 18 वीं बार कैसे पृथ्वीराज चौहान की दोनों आंखों को फोड़ा था। लेकिन फिर भी पुजारियों को यह लगता है कि उसे माफ कर देना चाहिए तो एक बार उनके किसी नबी या पैगम्बर पर टिप्पणी करके देख लें। भाईचारे का पता चल जायेगा। अखिल भारतीय सन्त परिषद् अपने स्तर पर उस सनातन धर्म के द्रोही पर एक्शन लेगी। हम हिमाचल प्रदेश में कहीं भी उसका जागरण नहीं होने देंगें। पत्रकारों को संबोधित करते हुए यति ने कहा कि ” सलीम को माफी देने का अधिकार उन पुजारियों को कैसे हो सकता है जिन्होंने किसी इस्लामिक पीर गुलाम शाह को माता जी के साथ जोड़ा था।
मास्टर सलीम ने माता की भेंटे गाकर  करोड़ों का साम्राज्य स्थापित किया है। इसलिए उससे पूछना चाहिए कि वह किस दिन की बात कर रहा है। चिंतपूर्णी मंदिर में अगर कोई हिंदू पुजारी बचा है तो उसे जांच की जिम्मेदारी उठानी चाहिए कि किन किन पुजारियों को लगता है कि गुलाम शाह अथवा मुराद शाह उनका बाप है। उन्हें तत्काल प्रभाव से मंदिर से बाहर निकाला जाए ?
बालयोगी बाबा ज्ञान नाथ ने कहा कि हम हिंदुओं को बार बार कह चुके हैं कि सलीम को अपने मंदिरों और जगरातों में मत बुलाया करो। वह सिर्फ एक कव्वाल है जो हमारी भजन पद्धति और शास्त्रीय संगीत को दूषित कर रहा है। मास्टर सलीम अगर मां चिंतपूर्णी को अपनी माता समझता है तो वह किसी गुलाम शाह को पिता नहीं मान सकता।
हिंदू समाज इस बात को समझ नहीं रहा है कि मास्टर सलीम जैसे लोग हिंदू संस्कृति को दूषित करने में लगे हैं। वे धीरे धीरे इस्लामिक पीरों, इस्लामिक सोच को हिंदुओं के अवचेतन मन में डालते जा रहे हैं। इससे इस्लामिक जिहादियों को हिंदुओं के भीतर पैठ बनाना आसान हो जाता है। ऐसे कव्वालों से सावधान रहें। उन्हें किसी भी कार्यक्रम, जागरण, पार्टी या रैली में न बुलाएं। 

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