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स्वदेशी जागरण मंच ने दिया ‘स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान’ को जनांदोलन का स्वरूप

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प्रधानमंत्री के स्वदेशी आह्वान को मंच ने बताया राष्ट्र सेवा का मार्ग
 
मीडिया बाइट: सत्यदेव शर्मा सहोड़, ज़िला पूर्णकालिक, स्वदेशी जागरण मंच, ऊना
 
ऊना/सुशील पंडित: स्वदेशी जागरण मंच ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए स्वदेशी अपनाने के आह्वान का स्वागत करते हुए इसे राष्ट्र सेवा का सशक्त माध्यम बताया है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा कि स्वदेशी उत्पादों की खरीद और बिक्री भी राष्ट्र की सच्ची सेवा है, जिस पर मंच ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मंच के जिला पूर्णकालिक सत्यदेव शर्मा ने आज यहां पत्रकार वार्ता में कहा कि आगामी दस अगस्त को जिला भर में मंच के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करेंगे।

1991 से निरंतर स्वदेशी को जन-आंदोलन का रूप देने में संलग्न स्वदेशी जागरण मंच का विश्वास है कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशी ही भारत की समृद्धि और सुरक्षा का मार्ग हैं। वैश्विक परिस्थितियों में, जब वैश्विक बाज़ार, मूल्य श्रृंखलाएँ और भुगतान प्रणालियां भी राजनीतिक हथियारों के रूप में प्रयुक्त हो रही हैं, ऐसे समय में स्वदेशी नीतियाँ भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की रक्षा में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।

मंच ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि चीन, तुर्की और अन्य शत्रु प्रवृत्ति वाले देशों के उत्पादों और सेवाओं का भारत में बढ़ता उपयोग न केवल हमारी अर्थव्यवस्था बल्कि सुरक्षा के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा है। मंच का मानना है कि भारतीयों को विदेशों में महंगे विवाह आयोजनों से बचना चाहिए, विदेशी विश्वविद्यालयों की ललक छोड़नी चाहिए और स्थानीय कारीगरों व उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। इससे देश की मूल्यवान विदेशी मुद्रा की रक्षा होगी और स्थानीय रोज़गार को बल मिलेगा।

12 जून 2025 को ‘स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान’ की शुरुआत के साथ स्वदेशी जागरण मंच ने एक बार फ़िर स्वदेशी आंदोलन को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में ला दिया है। यह अभियान भारत को फ़िर से महान (Make India Great Again – MIGA) बनाने की दिशा में चलाया गया सशक्त जन अभियान है।

मंच ने यह भी रेखांकित किया कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल राजनीतिक स्वतंत्रता का संघर्ष नहीं था, अपितु वह आर्थिक आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक अस्मिता और सभ्यतागत संप्रभुता का भी उद्घोष था। आज, डिजिटल एकाधिकार और चीनी उत्पादों की भरमार हमारे छोटे व्यापारियों, एमएसएमई और कुटीर उद्योगों के लिए खतरा बन चुकी है।

भारत-चीन व्यापार घाटा आज 99.2 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है। मंच ने यह प्रश्न भी उठाया है कि जब हमारे सैनिक सीमा पर शत्रु के विरुद्ध तैनात हैं, तब क्या हम अपने बटुए से दुश्मन की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करें?

इसके अतिरिक्त, अमेज़न, वॉलमार्ट (फ़्लिपकार्ट) जैसे विदेशी ई-कॉमर्स दिग्गजों द्वारा भारत के खुदरा व्यापार और नियमों की अनदेखी को भी मंच ने डिजिटल उपनिवेशवाद करार देते हुए इन पर सख्त निगरानी और नियंत्रण की मांग की है। मंच का मानना है कि भारत को विश्व से जुड़ना चाहिए, परंतु ऐसा वैश्वीकरण अस्वीकार्य है जो भारत को केवल एक बाज़ार बनाकर उसकी उत्पादन क्षमता को नष्ट करता है।

मंच ने सरकार से मांग की है कि:

•चीनी उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाए जाएं
•ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित किया जाए
•शिकारी मूल्य निर्धारण, भंडारण और अपने प्लेटफ़ॉर्म पर सेल्फ़-लेबल उत्पादों की बिक्री पर रोक लगे
अंत में, स्वदेशी जागरण मंच ने देश के प्रत्येक नागरिक से आह्वान किया है कि वे ‘स्वदेशी सुरक्षा एवं स्वावलंबन अभियान’ का भाग बनें और भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और आत्मगौरव से परिपूर्ण राष्ट्र बनाने की दिशा में सहभागी बनें।
इस मौके पर जिला परिषद के उपाध्यक्ष ओंकार नाथ कसाना, शिक्षा भारती के प्रदेश उपाध्यक्ष अमृतलाल भारद्वाज, हिन्दू एकता मंच से दीपक जोशी, विनय सहोड, भुपिंद्र सिंह भुप्पी व राज कुमार समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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