Punjab Govt AD
HomeNationalधर्म परिवर्तन मामले में Supreme Court का आया ऐतिहासिक फैसला

धर्म परिवर्तन मामले में Supreme Court का आया ऐतिहासिक फैसला

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने धर्म परिवर्तन को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग ही अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपना लेता है, तो उसे अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा और उसे SC/ST एक्ट के तहत संरक्षण भी नहीं मिलेगा। जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश के अनुसार जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानता है, वह अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आएगा। इसलिए धर्म परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।

बेंच ने कहा कि इस मामले में, याचिकाकर्ता का यह दावा नहीं है कि उसने ईसाई धर्म छोड़कर वापिस अपने मूल धर्म को अपना लिया है, या उसे मडिगा समुदाय ने फिर से स्वीकार कर लिया है। यह साबित होता है कि अपीलकर्ता लगातार ईसाई धर्म को मानता रहा और एक दशक से अधिक समय से पादरी के रूप में काम कर रहा है। जो गांव के घरों में नियमित रविवार की प्रार्थनाएं आयोजित करता है। यह भी स्वीकार किया गया है कि कथित घटना के समय, वह घर पर प्रार्थना सभा कर रहा था। ये सभी तथ्य कोई संदेह नहीं छोड़ते कि घटना की तारीख को वह एक ईसाई ही था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के मई 2025 के फैसले को सही ठहराया। यह मामला पादरी चिंताडा आनंद द्वारा दायर अपील से जुड़ा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके साथ जातिसूचक गालियां दी गईं और भेदभाव किया गया। आनंद की शिकायत पर पुलिस ने SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत FIR दर्ज की थी। इसके बाद आरोपी अक्कला रामिरेड्डी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर FIR रद्द करने की मांग की थी। हाईकोर्ट के जस्टिस एन. हरिनाथ ने FIR रद्द करते हुए कहा था कि आनंद ने ईसाई धर्म अपना लिया है, इसलिए वे अनुसूचित जाति का दावा नहीं कर सकते और SC/ST एक्ट का लाभ नहीं ले सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता करीब दस साल तक ईसाई धर्म का प्रचार करता रहा और रविवार की प्रार्थना भी कराता था। अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति खुले तौर पर दूसरे धर्म को मानता है और उसका पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति का लाभ नहीं ले सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के पास SC प्रमाणपत्र हो, लेकिन उसने ईसाई धर्म अपना लिया है, तो केवल प्रमाणपत्र होने से उसे अनुसूचित जाति का लाभ नहीं मिलेगा। अदालत ने कहा कि ईसाई धर्म में जाति व्यवस्था मान्य नहीं है, इसलिए धर्म परिवर्तन के बाद SC दर्जा समाप्त माना जाएगा।

 

 

 

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

- Advertisement -

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -
Punjab Govt AD

Latest News

- Advertisement -
- Advertisement -