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51 इंच की रामलला की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार का आया बयान, देखें वीडियो 

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अयोध्या : रामलला की मूर्ति बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने खुद को दुनिया का सबसे भाग्यशाली व्यक्ति बताया है। कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज आज राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे। अरुण योगीराज ने न्यू एजेंसी से कहा , “मुझे लगता है कि अब मैं इस धरती पर सबसे भाग्यशाली व्यक्ति हूं। मेरे पूर्वजों, परिवार के सदस्यों और भगवान राम का आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहा है। कभी-कभी मुझे ऐसा लगता है, जैसे मैं सपनों की दुनिया में हूं।” सोने और फूलों से सजी 51 इंच की रामलला की मूर्ति की आज अयोध्या के नए मंदिर में ‘प्राण प्रतिष्ठा’ हो गई है। समारोह से कुछ देर पहले मूर्ति का अनावरण किया गया है। प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में पीएम मोदी मुख्य यजमान थे। इस दौरान मंदिर के गर्भगृह में कई संतों ने मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम को संपन्न करवाया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने उतारी रामलला की आरती 

राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद रामललला की पहली झलक सामने आई है। रामलला की आंखों में मासूमियत, होठों पर मुस्कान, चेहरे पर गजब का तेज दिखाई दे रहा है। रामलला की पहली झलक दिल में बस जाने वाली है। भगवान की पहली झलक देखकर एक बात तो साफ है कि कर्नाटक के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बहुत ही खूबसूरत मूर्ति तैयार की है। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने रामलला की आरती उतारी। यह भव्य और दिव्य नजारा मन को मोह लेने वाला था। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दी बधाई

अयोध्‍या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्‍ठा अनुष्‍ठान में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रभु राम लला के भव्य, दिव्य और नव्य धाम में विराजने की आप सभी को कोटि-कोटि बधाई। इस क्षण मन भावुक है… निश्चित रूप से आप सब भी ऐसा महसूस कर रहे होंगे। पीएम मोदी ने कहा कि आज भारत युवा शक्ति से भरा हुआ है। ऐसी सकारात्मक परिस्थितियां ना जानें कितने साल बाद बनेगी। हमे अब चूकना नहीं है हमे अब बैठना नहीं है। आप उस  भारत से हैं जो आज चांद पर तिरंगा लहरा रहा है। जो आज सूरज पर भी मिशन भेज रहे हैं। 

जानें कौन है अरुण योगीराज

मूर्तिकार अरुण योगीराज कर्नाटक के मैसूर के रहने वाले हैं। उनकी कई पीढियां इसी काम से जुड़े हुए हैं। उनके पिता योगीराज शिल्पी एक बेहतरीन मूर्तिकार हैं और उनके दादा बसवन्ना शिल्पी ने वाडियार घराने महलों में अपनी कला दिखाई थी। अरुण मूर्तिकार का मैसूर राजा के कलाकारों के परिवार से संबंध है।

दादा की भविष्यवाणी हुई सच

शुरुआत में अरुण योगीराज अपने पिता और दादा की तरह मूर्तिकार नहीं बनना चाहते थे और उन्होंने 2008 में मैसूर यूनिवर्सिटी से एमबीए की पढ़ाई करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की। हालांकि, उनके दादा ने कहा था कि अरुण एक मूर्तिकार ही बनेगा और अंत में वही हुआ। अरुण एक मूर्तिकार बने और ऐसे मूर्तिकार, जिन्होंने साक्षात रामलला की मूर्ति बनाई।

अरुण योगीराज ने बनाई हैं कई मूर्तियां

अरुण योगीराज ने सिर्फ रामलला की ही मूर्ति नहीं बनाई है, बल्कि उन्होंने इससे पहले कई और भी मूर्तियां बनाई है, जिसके लिए उनकी तारीफ भी की गई है। अरुण योगीराज ने इंडिया गेट के पास स्थापित सुभाष चंद्र बोस की 30 फीट की मूर्ति बनाई है। इसके अलावा अरुण योगीराज ने भगवान आदि शंकराचार्य की 12 फीट की मूर्ति बनाई है, जिसकी स्थापना केदारनाथ में की गई है। उन्होंने मैसूर में स्थापित भगवान हनुमान की 21 फीट की मूर्ति भी बनाई है।

श्याम शिला पत्थर से रामलला की मूर्ति का निर्माण

अरुण योगीराज ने रामलला की मूर्ति का निर्माण श्याम शिला पत्थर को तराश कर किया है। रामलला की मूर्ति की ऊंचाई 4.24 फीट है, जो दिखने में काफी भव्य है। मूर्ति का वजन करीब 200 किलोग्राम है। मूर्ति में भगवान राम के कई अवतारों को तराशा गया है।

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